यह लेख Zakaat calculation से मुतल्लिक़ है। इसमें हम ज़कात से मुतल्लिक़ और ज़कात कब और कैसे निकालने हैं उससे मुतल्लिक़ पढ़ेंगे और जानेंगे।
इस्लाम एक मुकम्मल जीवन प्रणाली है जो इंसान को जिंदगी के हर पहलू में सही रास्ता दिखाता है। इसी तरह इस्लाम में माली (आर्थिक) व्यवस्था भी बताई गई है, जिसका मक़सद यह है कि समाज में दौलत सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित न रहे, बल्कि सब तक उसका फायदा पहुंचे।
ज़कात इसी व्यवस्था का एक अहम हिस्सा और इस्लामी आर्थिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है! है। ज़कात देने से माल पाक होता है, और गरीबों व ज़रूरतमंदों की मदद होती है। इससे समाज में मोहब्बत, बराबरी और इंसाफ का माहौल पैदा होता है और दौलत का सही तरीके से बंटवारा होता है। 🤲
Zakaat calculation (Zakaat kaise nikalen) यह जानना ज़रुरी है और ज़क़ात निकालने का तरीक़ा क्या है ये भी इस लेख में जानेंगे!
Note: is post ko Urdu me Yahan padhen
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Enter Current rate before Calculate
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जिसका भी ज़कात निकालनी हो उसका current rate डालें tola या gram वाले खाने में और फ़िर कितना tola या gram सोना या चांदी है वो नीचे ख़ाली खाने में भरें और zakaat Enter को touch करें नीचे zakaat Amount show करेगा।
Zakat Calculator
Zakat Amount: 0 INR
⚠️ Note: Nisab aur Zakaat ke fiqhi masail me ikhtilaf ho sakta hai. Apne area ke ulema se confirm karna behtar hai. Gold/Silver rate manual update karein (daily rate ke hisaab se). Yahan Apne zewar Ka Pura value likhen aur Zakaat calculate enter Karen Zakaat ka 2.5% niche show karega.
🕌 Zakaat Calculator (2.5%)
ज़कात का अर्थ:
ज़कात का अर्थ "शुद्धि" और "वृद्धि" से जुड़ा है। यह एक वित्तीय इबादत है, जो प्रत्येक ऐसे मुसलमान पर अनिवार्य होती है जो निर्धारित संपत्ति (निसाब) का मालिक हो और जिस पर एक चंद्र वर्ष बीत चुका हो। ज़कात केवल एक धार्मिक कर्तव्य ही नहीं, बल्कि यह समाज में आर्थिक संतुलन बनाए रखने और गरीबों के अधिकारों की रक्षा करने का भी एक माध्यम है।
ज़कात की अनिवार्यता और निसाब
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| Zakaat calculation (Zakaat kaise nikalen) |
कुरआन और हदीस में ज़कात की अनिवार्यता को स्पष्ट रूप से बताया गया है। अल्लाह तआला कुरआन में फ़रमाते हैं:
> "नमाज़ क़ायम करो और ज़कात अदा करो, और जो भी भलाई अपने लिए आगे भेजोगे, उसे अल्लाह के पास पाओगे।" (सूरह अल-बक़राह: 110)
> "नमाज़ क़ायम करो और ज़कात अदा करो, और जो भी भलाई अपने लिए आगे भेजोगे, उसे अल्लाह के पास पाओगे।" (सूरह अल-बक़राह: 110)
आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक महिला के हाथ में सोने ने के दो कंगन देखे तो आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उससे पूछा : क्या तुम इसकी ज़कात अदा करती हो ? उसने कहा नही। आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : क्या तुम्हें पसन्द है कि अल्लाह तआला क़यामत के दिन उसके बदले आग के दो कंगन पहनाये ? यह सुनकर उसने दोनों कंगन निकाल कर ज़मीन पर डाल दिये और कहा : ऐ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम यह दोनो अल्लाह और उसके रसूल के लिये हैं। (अबू दावूद , नसई - हसन सनद के साथ)
और उम्मे सल्मा रज़ि० से भी साबित है कि वह सोने के पाज़ेब पहना करती थीं। उन्होनें नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछा कि क्या यह भी "कन्ज" (खज़ाना) है ? इस पर आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया: जिस सोने की (निसाब पूरा होने के बाद) ज़कात अदा कर दी जाये वह कन्ज़ नहीं है।
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ज़कात उन लोगों पर फ़र्ज़ होती है जो निसाब की सीमा तक धन-संपत्ति के मालिक हों और जिनकी संपत्ति पर एक चंद्र वर्ष व्यतीत हो चुका हो। अलग-अलग प्रकार की संपत्तियों पर ज़कात की दर और निसाब अलग-अलग होते हैं, जिनका विवरण निम्नलिखित है:
3. नकदी (Cash) पर ज़कात
यदि कोई ज़मीन या प्लॉट बेचने के इरादे से खरीदा गया हो, तो उसकी मौजूदा बाज़ार क़ीमत पर 2.5% ज़कात देनी होगी।
निसाब:
जो लोग व्यापार करते हैं, उन्हें अपने संपूर्ण व्यापारिक स्टॉक की वार्षिक बाजार क़ीमत पर ज़कात देनी होगी।
ज़कात उन लोगों पर फ़र्ज़ होती है जो निसाब की सीमा तक धन-संपत्ति के मालिक हों और जिनकी संपत्ति पर एक चंद्र वर्ष व्यतीत हो चुका हो। अलग-अलग प्रकार की संपत्तियों पर ज़कात की दर और निसाब अलग-अलग होते हैं, जिनका विवरण निम्नलिखित है:
1. सोने पर ज़कात
निसाब:
यदि किसी के पास 87.48 ग्राम (7.5 तोला) या अधिक सोना हो और उस पर एक चंद्र वर्ष बीत जाए, तो 2.5% ज़कात अनिवार्य होगी।
उदाहरण:
यदि किसी के पास 10 तोला सोना है और बाज़ार में 1 तोला सोने की क़ीमत 200,000 रुपये है, तो:
कुल संपत्ति:
10 × 200,000 = 2,000,000 रुपये
ज़कात:
2,000,000 × 2.5% = 50,000 रुपये
यानी उसे 50,000 रुपये ज़कात अदा करनी होगी।
2. चांदी पर ज़कात
निसाब:
यदि किसी के पास 612.36 ग्राम (52.5 तोला) या अधिक चांदी हो, तो उस पर ज़कात अनिवार्य होगी।
उदाहरण:
यदि किसी के पास 60 तोला चांदी है और 1 तोला चांदी की क़ीमत 2,500 रुपये है, तो:
कुल संपत्ति:
60 × 2,500 = 150,000 रुपये
ज़कात:
150,000 × 2.5% = 3,750 रुपये
3. नकदी (Cash) पर ज़कात
निसाब:
यदि किसी के पास उतनी नकद राशि हो, जो 52.5 तोला चांदी के मूल्य के बराबर हो, तो ज़कात अनिवार्य होगी।
उदाहरण:
यदि निसाब 150,000 रुपये हो और किसी के पास 300,000 रुपये हों, तो ज़कात की गणना:
ज़कात:
300,000 × 2.5% = 7,500 रुपये
4. भूमि और संपत्ति पर ज़कात
व्यक्तिगत उपयोग की संपत्ति
यदि भूमि या मकान स्वयं के उपयोग के लिए है, तो उस पर ज़कात नहीं लगेगी।किराए पर दी गई संपत्ति
यदि किराए से प्राप्त आय निसाब तक पहुँचती है और एक वर्ष तक संचित रहती है, तो बची हुई राशि पर ज़कात अनिवार्य होगी।उदाहरण:
यदि किसी को वार्षिक किराया 500,000 रुपये प्राप्त होता है और वह 300,000 रुपये बचा लेता है, तो:
ज़कात:
300,000 × 2.5% = 7,500 रुपये
बिक्री के उद्देश्य से खरीदी गई भूमि या प्लॉट
यदि कोई ज़मीन या प्लॉट बेचने के इरादे से खरीदा गया हो, तो उसकी मौजूदा बाज़ार क़ीमत पर 2.5% ज़कात देनी होगी।
उदाहरण:
यदि किसी के पास 1 प्लॉट है जिसकी वर्तमान क़ीमत 2,000,000 रुपये है, तो ज़कात:
ज़कात:
2,000,000 × 2.5% = 50,000 रुपये
5. व्यापारिक संपत्ति (व्यापारिक माल) पर ज़कात
निसाब:
जो लोग व्यापार करते हैं, उन्हें अपने संपूर्ण व्यापारिक स्टॉक की वार्षिक बाजार क़ीमत पर ज़कात देनी होगी।
उदाहरण:
यदि किसी व्यापारी के पास 1,000,000 रुपये मूल्य का व्यापारिक सामान है, तो ज़कात:
ज़कात:
1,000,000 × 2.5% = 25,000 रुपये
ज़कात की अदायगी का सारांश:
सोना:
निसाब: 7.5 तोला (87.48 ग्राम)
ज़कात की दर: 2.5%
उदाहरण: अगर किसी के पास 10 तोला सोना हो और उसकी कीमत 200,000 रुपये प्रति तोला हो, तो कुल संपत्ति 2,000,000 रुपये होगी और इस पर 50,000 रुपये ज़कात देनी होगी।
चांदी:
निसाब: 52.5 तोला (612.36 ग्राम)
ज़कात की दर: 2.5%
उदाहरण: अगर किसी के पास 60 तोला चांदी हो और 1 तोला चांदी की कीमत 2,500 रुपये हो, तो कुल संपत्ति 150,000 रुपये होगी और इस पर 3,750 रुपये ज़कात देनी होगी।
नकदी:
निसाब: चांदी के निसाब के बराबर
ज़कात की दर: 2.5%
उदाहरण: अगर किसी के पास 300,000 रुपये हों, तो इस पर 7,500 रुपये ज़कात देनी होगी।
किराए की आय:
अगर किराए की आय निसाब के बराबर हो और एक साल तक जमा रहे, तो इस पर 2.5% ज़कात देनी होगी।
उदाहरण: अगर किसी को सालाना 500,000 रुपये किराया मिलता है और वह 300,000 रुपये बचा लेता है, तो इस पर 7,500 रुपये ज़कात देनी होगी।
व्यापारिक माल:
अगर किसी के पास व्यापारिक माल हो, तो उसकी मौजूदा बाजार कीमत पर 2.5% ज़कात देनी होगी।
उदाहरण: अगर किसी के पास 1,000,000 रुपये का व्यापारिक सामान हो, तो इस पर 25,000 रुपये ज़कात देनी होगी।
बिक्री के लिए खरीदी गई भूमि:
अगर भूमि या प्लॉट बिक्री के लिए खरीदी गई हो, तो उसकी मौजूदा कीमत पर 2.5% ज़कात देनी होगी।
उदाहरण: अगर किसी के पास 2,000,000 रुपये मूल्य का प्लॉट हो, तो इस पर 50,000 रुपये ज़कात देनी होगी।
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अनाथों और पाग़लों के माल में ज़कात का हुक्म
जमहूर उलमा-ए-इस्लाम के नज़दीक, यदि किसी यतीम या पागल के पास इतना माल हो जो निसाब की मात्रा तक पहुँच जाए और उस पर एक साल बीत जाए, तो उस पर ज़कात वाजिब होगी। इसकी अदायगी उनके वली (संरक्षक) के ज़िम्मे होगी, जो साल के अंत में उनकी तरफ़ से ज़कात अदा करेगा।
इसका आधार वह हदीस है जिसमें रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने जब मुआज़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) को यमन भेजा, तो फ़रमाया:
"अल्लाह ने उनके माल में ज़कात वाजिब की है, जो उनके मालदारों से ली जाएगी और उनके मुहताजों पर खर्च की जाएगी।"(सहीह बुखारी: 1395, सहीह मुस्लिम: 19)
इस हदीस से साबित होता है कि हर वह व्यक्ति जिसके पास निसाब के बराबर माल हो, उसके लिए ज़कात अनिवार्य है, चाहे वह यतीम हो या पागल, क्योंकि ज़कात का हुक्म माल से संबंधित है, न कि व्यक्ति की समझ-बूझ से।
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Conclusion:
Zakaat calculation (Zakaat kaise nikalen) समझ गए होंगे आप तो आप अपना ज़कात निकालें और गरीबों ,मोहताजों की मदद ज़रूर करें !ज़कात इस्लामी समाज में धन के न्यायसंगत वितरण का एक प्रभावी साधन है। यह न केवल धन को शुद्ध करता है बल्कि गरीबों, जरूरतमंदों और वंचित लोगों की सहायता भी करता है। ज़कात की अदायगी आर्थिक संतुलन को बनाए रखने, सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देने और अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है।हर मुसलमान को चाहिए कि वह ईमानदारी के साथ ज़कात अदा करे और अपने धन में दूसरों का हक़ अदा करे। इससे समाज में आर्थिक स्थिरता और परस्पर सहानुभूति को बढ़ावा मिलता है।
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FAQs:
Que: जकात और फितरा में क्या अंतर है ?
Ans: ज़कात इस्लाम के ख़ास फर्ज़ों में से एक अहम फ़र्ज़ है जिसके तहत अपने जमा किए हुवे माल का एक खास हिस्सा गरीबों और मिस्किनों की मदद के लिए निकाला फ़र्ज़ है ! और सदका ए फितर रोजेदार को बेहूदगी और बेहयाई बातों से पाक करने के लिए और मोहताजों के खाने का इंतज़ाम करने के लिए फर्ज़ किया गया
उत्तर: ज़कात सोना, चांदी, नकद, ज़मीन और संपत्ति, और व्यापारिक माल पर फ़र्ज़ होती है, जब इन पर निसाब पूरा हो और एक साल गुज़र जाए।
प्रश्न: ज़कात का निसाब क्या है?
उत्तर: सोने का निसाब 87.48 ग्राम (7.5 तोला) और चांदी का निसाब 612.36 ग्राम (52.5 तोला) होता है।
प्रश्न: ज़कात की दर कितनी है?
उत्तर: ज़कात की दर 2.5% है, यानी आपके माल का 2.5% ज़कात के रूप में देना होता है।
प्रश्न: अगर मेरे पास 1 तोला सोना हो, तो क्या मुझे ज़कात देनी होगी?
उत्तर: नहीं, अगर आपके पास 1 तोला सोना है, तो वह निसाब पूरा नहीं करता, इसलिए आपको ज़कात नहीं देनी होगी।
प्रश्न: क्या व्यापारिक माल पर ज़कात देनी होती है?
उत्तर: हाँ, अगर किसी के पास व्यापारिक माल हो, तो साल के अंत में उसकी मौजूदा बाजार कीमत पर 2.5% ज़कात फ़र्ज़ होती है।
Que: एक आदमी का फितरा कितना होता है?
Ans: एक आदमी का fitra तक़रीबन 2.5 किलोग्राम होता है और जो अनाज आप खाते है वैसा ही अनाज दिया जाता है !
Que: कौनसा सदका सबसे अफ़ज़ल है ?
Ans: नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लमने फ़रमाया मिस्कीन यानी ग़रीब गुरबा को सदका देना सिर्फ सदका है और रिश्तेदार को सदका देने में दो भलाइयां हैं। यह सदका भी है और सिला रहमी भी।
Que: कौनसा सदका कबूल है ?
Ans: जो कोई ईद की नमाज़ से पहले सदका़ करे तो ये मक़बूल सदका़ ए फि़तर है और जो नमाज़ के बाद करे वो आम सदका होगा।
Que: एक आदमी का फितरा कितना होता है?
Ans: एक आदमी का fitra तक़रीबन 2.5 किलोग्राम होता है और जो अनाज आप खाते है वैसा ही अनाज दिया जाता है !
Que: कौनसा सदका सबसे अफ़ज़ल है ?
Ans: नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लमने फ़रमाया मिस्कीन यानी ग़रीब गुरबा को सदका देना सिर्फ सदका है और रिश्तेदार को सदका देने में दो भलाइयां हैं। यह सदका भी है और सिला रहमी भी।
Que: कौनसा सदका कबूल है ?
Ans: जो कोई ईद की नमाज़ से पहले सदका़ करे तो ये मक़बूल सदका़ ए फि़तर है और जो नमाज़ के बाद करे वो आम सदका होगा।
Que: जकात कब फर्ज है?
Ans: ज़कात हर साहिबे निसाब पर फ़र्ज़ है, जिसके पास साढ़े बावन तोला चांदी या साढ़े सात तोला सोना या इतनी रक़म हो उसे ज़कात देना ज़रूरी है !
Que: मुस्लिम लोग जकात क्यों देते हैं?
Ans: क्योंकि जकात फ़र्ज़ है जो जकात न देगा ज़कात अदा नही करेगा तो क़यामत के दिन उसका माल निहायत ज़हरीले गंजे साँप की शकल इखतरियर कर लेगा और उसे डसेगा
Que: जकात कैसे निकाला जाता है?
Ans: ज़कात" आपकी पिछले साल की संपत्ती की मुल्य बढ़ोत्तरी का 2•5% हिस्सा यदि आभूषण निश्चित तय मात्रा अर्थात 52 तोला और 6 मासा चाँदी के मुल्य से अधिक हों तो उनके कुल मुल्य के 2•5% हिस्सा ज़कात का मुल्य होता है।
Que: हम फितरा क्यों देते हैं?
Ans: फि़तर का मकसद रोज़े की हालत में सरज़द होने वाले गुनाहों और कमी कोताही से ख़ुद को पाक करना होता है इसी लिए फितरा देना चाहिए!


1 Comments
Jazak Allah Khair
ReplyDeleteplease do not enter any spam link in the comment box.thanks