Ramzan ka Aakhiri Ashrah aur Muslim Auraten | Lailatul Qadr ki Talaash Ya Shopping Maal

अफ़सोस की बात यह है कि आज के दौर में बहुत सी मुस्लिम बहनें रमज़ान के इस सबसे क़ीमती वक़्त को भी दुनियावी तैयारियों में गुज़ार देती हैं।

रमज़ान का महीना मुसलमानों के लिए रहमत, बरकत और मग़फिरत का महीना है। लेकिन इस पूरे महीने में सबसे ज़्यादा अहमियत Ramzan ka Aakhiri Ashrah (आख़िरी दस दिनों) की होती है। यही वो मुक़द्दस रातें हैं जिनमें लैलतुल क़द्र जैसी अज़ीम और बेमिसाल रात तलाश की जाती है — वह रात जिसके बारे में क़ुरआन में बताया गया है कि यह हज़ार महीनों से बेहतर है।

✍️ By: Mohib Tahiri | 🕋 Islamic Articles| Ramzan Aur ibadat| Lailatul Qadr| Ramzan Mein Gaflat 🕰 Updated: 10 Mar 2026

Ramzan ka Aakhiri Ashrah aur Muslim Auraton ki Gaflat

Aakhri Ashra Aur lailatul Qadr se Auraton ki Gaflat 


अल्लाह तआला ने फ़रमाया:
“लैलतुल क़द्र हज़ार महीनों से बेहतर है।”
(सूरह अल-क़द्र: 3)
यानी अगर कोई बंदा इस रात में सच्चे दिल से इबादत करे, तो उसे 83 साल से ज़्यादा इबादत का सवाब मिल सकता है।

👉 लेकिन अफ़सोस की बात यह है कि आज के दौर में बहुत सी मुस्लिम बहनें रमज़ान के इस सबसे क़ीमती वक़्त को भी दुनियावी तैयारियों में गुज़ार देती हैं।

इस आर्टिकल Ramzan ka Aakhiri Ashrah aur Muslim Auraten के ज़रिए हम अपनी उन मां और बहनों को एक नसीहत देना चाहते हैं कि lailatul Qadr यानी रमज़ान के आख़िरी अशरे की क़दर करें। दुनियावी जिंदगी से ज्यादा आख़िरत की जिंदगी को तरजीह दें।  

औरतों के लिए खास नसीहत: रमज़ान का आख़िरी अशरा – लैलतुल क़द्र या शॉपिंग मॉल?

रमज़ान का आख़िरी अशरा सबसे क़ीमती और सबसे अज़ीम वक़्त होता है। यही वो दिन और रातें हैं जिनमें लैलतुल क़द्र जैसी बेमिसाल रात तलाश की जाती है — वो रात जो हज़ार महीनों से बेहतर है।

लेकिन अफ़सोस…

आज अक्सर देखा जाता है कि जैसे ही रमज़ान का आख़िरी अशरा शुरू होता है, मार्केट्स और शॉपिंग मॉल्स में भीड़ बढ़ जाती है। 

आज की बहुत सी बहनें इस आख़िरी अशरे को भी:

  • ईद की शॉपिंग में
  • कपड़ों की तलाश में
  • जूतों-चूड़ियों में
  • मेहंदी के डिज़ाइन सोचने में
  • और ब्यूटी पार्लर की अपॉइंटमेंट में गुज़ार देती हैं

ये सब चीज़ें अपनी जगह जायज़ हैं,
लेकिन सवाल ये है:
क्या इन्हीं कामों के लिए अल्लाह ने हमें रमज़ान का आख़िरी अशरा दिया था?

👉 Ek din hamari hasti mit jayegi,ham is duniya ko chhor kar Allah ke paas jane wale hain kya Aap iske liye Taiyar Hain 


लैलतुल क़द्र की रात की अहमियत

लैलतुल क़द्र वह मुबारक रात है जिसमें:
  • फरिश्ते ज़मीन पर उतरते हैं
  • अल्लाह अपने बंदों की तक़दीरें लिखता है
  • मग़फिरत के दरवाज़े पूरी तरह खुले होते हैं
  • बंदों की दुआएँ क़ुबूल होती हैं
  • गुनाह माफ़ किए जाते हैं
  • अल्लाह अपने बंदों पर रहमत बरसाता है
क़ुरआन में अल्लाह तआला फ़रमाता है:
“उस रात फ़रिश्ते और रूह (जिब्रील) अपने रब के हुक्म से हर काम के लिए उतरते हैं।”
(सूरह अल-क़द्र: 4)

मगर हम क्या करते हैं?

  • किसी मार्केट में भीड़ में घूम रहे होते हैं
  • किसी दुकान पर कपड़े ट्रायल कर रहे होते हैं
  • मोबाइल पर मेहंदी के नए डिज़ाइन खोज रहे होते हैं

सोचिए…
अगर उस रात आपकी क़िस्मत बदलने वाली दुआ क़ुबूल हो रही हो
और आप किसी शॉपिंग मॉल में खड़े हों —
तो इससे बड़ा नुकसान और क्या होगा?


सजना-संवरना गुनाह नहीं, लेकिन शुरुआत ग़लत न हो, सही हो

ये बात बिल्कुल सही है कि:

  • ईद की तैयारी करना गुनाह नहीं
  • अच्छे कपड़े पहनना इस्लाम में मना नहीं
  • मेहंदी लगाना हराम नहीं

लेकिन मसला गुनाह-हलाल का नहीं है,
मसला तरजीह (प्रायोरिटी) का है।

आख़िरी अशरे की रातें साल में सिर्फ़ एक बार मिलती हैं,
लेकिन शॉपिंग तो पूरे साल हो सकती है।

👉 कपड़े, चूड़ियाँ और मेहंदी आपकी दुनिया को थोड़ी देर के लिए सजा सकती हैं…
👉 आपकी ज़िंदगी नहीं बदल सकतीं…
👉 लेकिन लैलतुल क़द्र आपकी आख़िरत बदल सकती है, हमेशा के लिए सजा सकती है।


अक़्लमंदी क्या है? पहले आख़िरत, फिर दुनिया

अक़्लमंद और समझदार मुस्लिम औरत वह है जो:
  • ईद की ज़रूरी शॉपिंग रमज़ान से पहले कर ले
  • आख़िरी अशरे को इबादत के लिए खाली रखे
  • तहज्जुद की नमाज़ पढ़े
  • क़ुरआन की तिलावत करे
  • अपने गुनाहों पर तौबा करे और रोए
  • अपने बच्चों और शौहर के लिए दुआ करे
  • पूरी उम्मत के लिए दुआ करे
आज अगर आपने ये आख़िरी अशरा गंवा दिया,

👉 तो यह भी हो सकता है कि यह आपका आख़िरी रमज़ान हो।
👉कौन जानता है कि अगला रमज़ान हमें नसीब होगा या नहीं?

बहनों के लिए दिल से निकलने वाली नसीहत

बहनो!
ईद का एक दिन है,
लेकिन आख़िरत हमेशा के लिए है।

एक दिन आप नई ड्रेस पहन लेंगी,
लोग तारीफ़ भी कर देंगे…
लेकिन वो तारीफ़ क़ब्र में काम नहीं आएगी।

क़ब्र में काम आएँगी:

  • आपकी दुआएँ
  • आपकी सजदे
  • आपकी तौबा
  • आपकी रातों की रोना
  • आपकी ख़ामोशी में की गई इबादत
इसलिए आज ही यह फैसला कर लीजिए:
इस रमज़ान के आख़िरी अशरे को मैं अल्लाह के लिए खास कर दूंगी।”


निष्कर्ष (Conclusion)

रमज़ान का आख़िरी अशरा अल्लाह की तरफ़ से दिया हुआ एक बहुत बड़ा तोहफ़ा है। यही वो मुक़द्दस रातें हैं जिनमें लैलतुल क़द्र जैसी अज़ीम रात छुपी हुई है, जो हज़ार महीनों से बेहतर है। समझदार इंसान वही है जो इस क़ीमती वक़्त की क़दर करे और इसे इबादत, तौबा और दुआ में गुज़ारे।

मेरी प्यारी बहनों!
दुनिया की तैयारियाँ कभी खत्म नहीं होतीं। कपड़े, चूड़ियाँ, मेहंदी और सजावट की चीज़ें हर साल मिल जाएँगी, लेकिन लैलतुल क़द्र की रात साल में सिर्फ़ एक बार आती है। अगर हमने इस वक़्त को ग़फ़लत में गुज़ार दिया, तो शायद हमें कभी इसका बदला न मिल सके।

इसलिए कोशिश करें कि आख़िरी अशरे की रातों को अल्लाह के लिए खास कर दें — क़ुरआन की तिलावत करें, तहज्जुद पढ़ें, अपने गुनाहों पर तौबा करें और अपने लिए, अपने घर वालों के लिए और पूरी उम्मत के लिए दिल से दुआ करें।

👉 याद रखिए,
ईद की खुशी कुछ घंटों की होती है, लेकिन आख़िरत की कामयाबी हमेशा के लिए होती है।

🤲अल्लाह हम सबको रमज़ान के आख़िरी अशरे की क़दर करने और लैलतुल क़द्र की बरकतें हासिल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

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Author
इस्लामी ब्लॉगर — सही दीन और इल्म को आम करने की कोशिश। आख़िरी अशरे की क़दर व क़ीमत को समझें और दुनिया की ग़फ़लत को छोड़ कर अपनी आख़िरत संवारे। 



FAQs (हिंदी)

1️⃣ रमज़ान के आख़िरी अशरे की क्या अहमियत है?

रमज़ान का आख़िरी अशरा सबसे मुबारक और कीमती वक़्त होता है। इन्हीं रातों में लैलतुल क़द्र की तलाश की जाती है, जो क़ुरआन के मुताबिक हज़ार महीनों से बेहतर है।

2️⃣ लैलतुल क़द्र की रात में क्या खास होता है?

इस रात में फ़रिश्ते ज़मीन पर उतरते हैं, बंदों की दुआएँ क़ुबूल होती हैं और अल्लाह तआला अपने बंदों को मग़फिरत और रहमत से नवाज़ता है।

3️⃣ क्या रमज़ान के आख़िरी अशरे में शॉपिंग करना गलत है?

शॉपिंग करना हराम नहीं है, लेकिन अगर इसकी वजह से इबादत और लैलतुल क़द्र की तलाश छूट जाए तो यह बहुत बड़ा नुकसान है।

4️⃣ मुस्लिम औरतों को आख़िरी अशरे में क्या करना चाहिए?

मुस्लिम औरतों को चाहिए कि वह इस वक़्त को इबादत में गुज़ारें, जैसे क़ुरआन की तिलावत, तहज्जुद की नमाज़, तौबा और दुआ।

5️⃣ आख़िरी अशरे की तैयारी कैसे करें?

बेहतर यह है कि ईद की ज़रूरी शॉपिंग रमज़ान से पहले कर ली जाए ताकि आख़िरी अशरा पूरी तरह इबादत के लिए खाली रहे।


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