Sehri Aur Iftar Ki Fazeelat | Sunnat Tareeqa Aur Duayein

"रोज़ा खोलते , अफ़्तार के वक़्त की दुआ: ذَهَبَ الظَّمَأُ وَابتَلَّتِ العُروقُ ، وَثَبَتَ الْأجْرُ إِنْ شَاءَ اللهُ ज़हा-बज़्ज़मओ वब्बतल्लतिल उरूक़ो व सब-तल अज्रो इन शा अल्लाह" प्यास चली गई, रगें तर होगईं और यदि अल्लाह तआला ने चाहा तो नेकी भी मिलेगी इंशॉल्लाह,

रमज़ान की बरकतों में Sehri Aur Iftar को खास मुक़ाम हासिल है। यह सिर्फ़ खाने-पीने के वक़्त नहीं, बल्कि दुआ, शुकर और सुन्नत पर अमल करने के बेहतरीन मौके होते हैं। Sehri Aur Iftar Ki Fazeelat को समझें और इसका फ़ायदा उठाएं। सहरी दिन भर की इबादत के लिए ताक़त देती है, जबकि इफ़्तार सब्र और अल्लाह पर भरोसे का इनाम होता है।

इन दोनों पलों में रहमतें नाज़िल होती हैं और दुआएँ क़ुबूल होने की उम्मीद बढ़ जाती है। अगर इन्हें नबी ﷺ के बताए हुए सुन्नत तरीक़े से अदा किया जाए, तो रोज़े का सवाब और रूहानियत दोनों बढ़ जाते हैं। इस हिस्से में हम जानेंगे कि सहरी और इफ़्तार की फ़ज़ीलत क्या है, उनका सही सुन्नत तरीक़ा क्या है और कौन-कौन सी दुआएँ पढ़नी चाहिए। 🌙🤲

Iftar ke waqt khajoor aur pani ka manzar

Sehri aur iftar me barkat rakhi gayi hai


सहरी क्या है?

सहरी उस खाने-पीने को कहते हैं जो रोज़ा रखने के इरादे से
सुब्ह-ए-सादिक़ से पहले किया जाता है।

सहरी करना रोज़े की सुन्नत है और इसमें बहुत बड़ी बरकत रखी गई है।


सहरी की फ़ज़ीलत

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

“सहरी किया करो, क्योंकि सहरी में बरकत है।”
📘 (सहीह बुख़ारी, सहीह मुस्लिम)

👉 इससे पता चलता है कि:

सहरी करना सिर्फ़ सेहत के लिए नहीं
बल्कि अल्लाह की रहमत पाने का ज़रिया है

सहरी का सही वक़्त क्या है?

✔ सहरी आख़िरी वक़्त में करना बेहतर है
✔ लेकिन फज्र से पहले तक

📘 हदीस:
“मेरी उम्मत भलाई पर रहेगी जब तक सहरी में देर और इफ़्तार में जल्दी करेगी।”
📘 (मुसनद अहमद)

👉 Rozana Subah se Shaam tak padhi jane wali Masnoon Duayein. zarur padhen ise 


क्या सहरी छोड़ी जा सकती है?

रोज़ा सहरी के बग़ैर भी हो जाता है
लेकिन सहरी छोड़ना सुन्नत छोड़ना है

👉 कोशिश करनी चाहिए कि:

थोड़ा ही सही
पानी या खजूर से सहरी ज़रूर करें

इफ़्तार क्या है?

इफ़्तार सूरज डूबते ही रोज़ा खोलने को कहते हैं।
इफ़्तार में देर करना सही नहीं, जल्दी करना सुन्नत है।


🕌 इफ़्तार की फ़ज़ीलत (हदीस से)

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
“लोग भलाई पर रहेंगे जब तक इफ़्तार में जल्दी करेंगे।”
📘 (सहीह बुख़ारी)

जब तक लोग इफ़्तार करने में जल्दी करते रहेंगे दीन ग़ालिब रहेगा क्योंकि यहूद और नसारा (इफ़्तार करने में) देरी करते हैं। अबू-दाऊद और इब्ने-माजा (मिशकात अलमसाबीह:1995)


इफ़्तार किस चीज़ से करना सुन्नत है?

रसूलुल्लाह ﷺ:
✔ ताज़ा खजूर
✔ सूखी खजूर
✔ या पानी से
इफ़्तार किया करते थे।

हज़रत अनस (रज़ि०) बयान करते हैं कि:

नबी (सल्ल०) नमाज़ (मग़रिब) पढ़ने से पहले कुछ ताज़ा खजूरों से इफ़्तार किया करते थे। अगर ताज़ा खजूरें न होतीं तो फिर कुछ छुआरों से और अगर छुआरे न होते तो फिर पानी के कुछ घूँट पी लिया करते थे। तिरमिज़ी अबू-दाऊद और इमाम तिरमिज़ी ने फ़रमाया : ये हदीस हसन ग़रीब है। तिरमिज़ी और अबू-दाऊद। (मिशकात अलमसाबीह:1991)


🤲 इफ़्तार की दुआ (हदीस से साबित)

हज़रत इब्ने-उमर (रज़ि०) बयान करते हैं कि जब नबी (सल्ल०) रोज़ा इफ़्तार करते तो आप ये दुआ पढ़ा करते थे : (अबू-दाऊद)1993


Iftar ke waqt padhi jane wali Masnoon Dua
Iftaar ki masnoon dua 

ذَهَبَ الظَّمَأُ وَابتَلَّتِ العُروقُ ، وَثَبَتَ الْأجْرُ إِنْ شَاءَ اللهُ

 Zahabaz Zam’ou Wab’tallatil Ouru’qu Wa Sabatal Ajru In shaa Allah.”

“ज़हबज़्-ज़मा-उ, वब्तल्लतिल उरूक़, व सबतल अज्रु इं शा अल्लाह।”
📖 अर्थ:
प्यास बुझ गई, नसें तर हो गईं और सवाब साबित हो गया, इंशा अल्लाह।

इसे अबू दाऊद (हदीस संख्या : 2357) और दारक़ुत्नी (हदीस संख्या : 25) ने रिवायत किया है और इब्ने हजर ने ''अत-तल्खीसुल हबीर'' (2/202) में कहा है कि : ''दारक़ुत्नी ने फ़रमाया: इसकी इसनाद हसन दर्जे की है।''

 रोज़ेदार की दुआ कबूल होती है

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
“तीन लोगों की दुआ रद्द नहीं होती: रोज़ेदार की इफ़्तार के वक़्त…”
📘 (तिर्मिज़ी)
👉 इसलिए इफ़्तार से पहले:
✔ अपने लिए
✔ घरवालों के लिए
✔ पूरी उम्मत के लिए
दुआ ज़रूर करें।

⚠️ इफ़्तार और सहरी में गलतियाँ

♦️ज़्यादा खाना
♦️ नमाज़ में देर
♦️ दुआ भूल जाना
♦️ फिज़ूल बातों में वक़्त गंवाना

👉 याद रखें:
इफ़्तार शुक्र का वक़्त है,
न कि सिर्फ़ पेट भरने का।


सहरी और इफ़्तार से मिलने वाला सबक़

✔ सुन्नत की अहमियत
✔ सब्र का इनाम
✔ अल्लाह की नेमतों की क़द्र
✔ दुआ से रिश्ता

👉 Aaj hamare paas mouqa hai kal ka bharosa nahi,apni Aakhirat ka Saaman Aaj hi Taiyar Kar Lo 


"नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया: सेहरी खाया करो क्योंकि सेहरी खाने में बरकत है,मोमिन की बेहतरीन सेहरी खजूर है

सेहरी की कोई भी दुआ़ हदीस से साबित नही

नियत दिल के इरादे का नाम है। नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लमका का फ़रमान है। 
आप (सल्ल०) ने फ़रमाया कि तमाम अ़माल का दारोमदार नीयत पर है और हर अमल का नतीजा हर इन्सान को उसकी नीयत के मुताबिक़ ही मिलेगा। (बुखारी :1)
दुआ़ एक इ़बादत है और इ़बादत हमें उसी त़रीके़ से करनी है जो त़रीक़ा हमें हमारे नबी ﷺ ने सिखाया है। और हमारे नबी ﷺ ने सेहरी की कोई दुआ़ नी बताई। यह दुआ़ जो हमारे मुआ़शरे में पढ़ी जाती है
وَبِصَوْمِ غَدٍ نَّوَيْتُ مِنْ شَهْرِ رَمَضَانَ

तर्जमा:(मैने माह ए रमज़ान के कल के रोज़े की नियत की)
इसका तर्जमा ही पढ़ने से समझ में आ रहा है की ये बनावटी है, आप रोज़ा आज रख रहे हैं और नियत कल की की जा रही
यह सहरी की दुआ इजाद की हुई है इसकी कोई दलील नही है लिहाज़ा यह बिदअ़त है हमारे अ़मल तबी कुबूल होंगे जब वो रसूल ﷺ के सुन्नत के मुताबिक होंगे।

👉 Video देखें कि सेहरी की दुआ की हक़ीक़त क्या है 


रमज़ान के रोज़े की नियत:

आपका सहरी के लिए उठना ही नियत में शुमार है। और दिल में नियत यह कर लें की आज का रोज़ा रखना है यही आप की रोज़े की नियत हो गई ,ज़ुबान से कुछ पढने की ज़रूरत नही ! 

👉 इस video में देखें कि रोज़े की नियत कैसे की जाती है 

बिस्मिल्लाह करें और जो मयस्सर हो खा लें।
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया: जब तुम में से कोई खाना खाने लगे तो " बिस्मिल्लाह " पढ़े (तिर्मजी:1858)

Note: जिस दिन हमे रोज़ा रखना है उस दिन दिल में ये नियत ज़रूर करनी है की आज का रोज़ा हमे रखना है नही तो हमारा रोज़ा ही नही होगा! कई लोग ऐसे है की सुबह जल्दी में उठे और कुछ खाए और फिर सो गए कुछ तो ऐसे हैं की जब सेहरी का वक्त ख़त्म होने को होता है तो उठते हैं,बिस्तर से बाहर ही नही होते और पानी पिए, सो गए !ये दिल में नियत ही नही की के आज का रोज़ा हमे रखना है ऐसे में रोज़ा बेगैर नियत का क़बूल ही नही होगा


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क्या इफ्तार करने की ये दुआ हदीस से साबित है?

اَللّٰهُمَّ اِنِّی لَکَ صُمْتَ اٰمَنْتُ وَعَلَيْکَ تَوَکَّ لْتُ وَعَلٰی رِزْقِکَ اَفْطَرْتُ

इफ़्तार की इस दुआ से मुतल्लिक़ ये video ज़रूर देखें 


अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुमत वा बिका अमंतु व 'अलैका तवक्कल्तू व 'अला रिज़्किका अफ़्तार्तु'।
हमारे कुछ भाई बहन इफ़्तार के बआ़द यह दुआ़ पढ़ते हैं जबकि ये दुआ़ सही हदीस से साबित नही है.इसको शेख़ अल्बानी ने अबू दाऊद,2358 में ज़ईफ कहा है !

रोज़ेदार ध्यान दें

👉 सहरी और इफ़्तार में ज़्यादा तली-भुनी, चिकनाई और मसालेदार चीज़ों से बचें। रमज़ान में हल्का और संतुलित खाना बेहतर है। अपने खाने में दही, दाल, सूखे मेवे, हरी सब्ज़ियाँ, फल, कच्चा पनीर और दूध शामिल करें।

👉 फाइबर और प्रोटीन वाली चीज़ें ज़रूर खाएँ, क्योंकि इससे देर तक भूख नहीं लगती और शरीर को ताक़त मिलती है। इफ़्तार में बहुत ज़्यादा पानी एक साथ न पिएँ, बल्कि थोड़ा-थोड़ा करके पिएँ ताकि खाना आसानी से पचे।

👉 तली हुई चीज़ों और फास्ट फूड से बचें। तरल पदार्थों का संतुलित इस्तेमाल करें ताकि शरीर और गुर्दे स्वस्थ रहें। सहरी में सादा रोटी, ताज़े फल और हल्का खाना बेहतर है। चाय, कॉफी और सोडा कम लें।

👉 इफ़्तार में खजूर ज़रूर खाएँ। यह सुन्नत भी है और सेहत के लिए भी फायदेमंद है। खजूर ऊर्जा और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं।

🤲 अल्लाह तआला से दुआ है कि हमारा यह रहमतों और बरकतों वाला रमज़ान सेहत और सलामती के साथ गुज़रे। आमीन।

सहरी और इफ़्तार रमज़ान की दो अज़ीम सुन्नतें हैं।
जो शख़्स इन्हें सुन्नत के मुताबिक़ अदा करता है, वह सिर्फ़ रोज़ा नहीं रखता बल्कि सुन्नत पर अमल भी करता है।

👉 सहरी में बरकत है
👉 इफ़्तार में रहमत है
👉 और दुआ में क़बूलियत

 Sehri aur iftaar ki Dua और नमाज़ की ज़बानी निय्यत करने से मुतअ़ल्लिक़ कोई भी सहीह हदीस नही है और यही वजह है कि उलमा-ए-हक़ इस ज़बानी नियत से मना फ़रमाते हैं कि दीन में इसका कोई रूतबा नही और ना ही अहमियत है।

आएशा (राज़:) रिवायत करती हैं की नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया " जिसने हमारे दीन में कुछ ऐसी बात शामिल की जिसपर हमारा अ़मल नही तो वह मरदूद है (बुखारी:2697 मुस्लिम: 1718)और सुन्न कुबरा बैहकी 138 में है की तमाम बिदअ़तें गुमराही हैं अगर्चे बजा़हिर वोह लोगों को अच्छा लगे
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Author
इस्लामी ब्लॉगर — सही दीन और इल्म को आम करने की कोशिश।


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Frequently Asked Questions:

Que: सेहरी और इफ़्तार में क्या अंतर है?

Ans: रमज़ान के दिनों में रोज़ा रखने वाले सुबह की अज़ान से पहले उठ कर रोज़ा रखने यानी दिन भर भूखे रहने की नियत से कुछ खाते पीते हैं ताकि दिन भर भूखा रह सकें,यही सेहरी कहलाता है और शाम को जैसे ही मगरिब की अज़ान होगी तो खजूर और पानी से अपनी रोज़ा तोड़ देते हैं इसी को इफ्तार कहते हैं यानी अब खाने पीने की बिल्कुल छूट है सुबह तक!

Que: सेहरी खाने का टाइम क्या है?

Ans: सुबह की अज़ान होने से पहले तक सेहरी खाने का वक्त है.अगर कोई सेहरी खा रहा है अज़ान होने लगी तो वो अपनी सेहरी को पूरा कर ले यानी जो खा रहा है उसे पूरा करले फिर उठे!

Que: इफ्तार में क्या दुआ पढ़ी जाती हैं?

Ans: बिस्मिल्लाह पढ़ कर इफ़्तार शुरू करें और इफ्तार के बआ़द ये दुआ पढ़ें
Zahabaz Zam’ou Wab’tallatil Ouru’qu Wa Sabatal Ajru In shaa Allah.”
‘‘ज़हा-बज़्ज़मओ वब्बतल्लतिल उरूक़ो व सब-तल अज्रो इन शा अल्लाह"
प्यास चली गई, रगें तर होगईं और यदि अल्लाह तआला ने चाहा तो नेकी भी मिलेगी इंशॉल्लाह

Que: सेहरी का मतलब क्या होता है?

Ans: एक रोज़ादार रोज़ा रखने यानी दिनभर भूखा रहने के लिए सुबह फजर की अज़ान से पहले जो खाना खाता या नाश्ता करता है वही सेहरी कहलाता है !

Que:क्या सेहरी की कोई दुआ है ?

Ans: नही सेहरी की कोई दुआ सुन्नत से साबित नही है ! सिर्फ बिस्मिल्लाह पढ़े और सेहरी खा लें! ये जो सेहरी की दुआ है ये बनावटी दुआ है 
وَبِصَوْمِ غَدٍ نَّوَيْتُ مِنْ شَهْرِ رَمَضَانَ


Que: मुसलमान सेहरी क्यों करते हैं?

Ans: मुस्लमान सेहरी इस लिए करते हैं की दीन भर भूखा रहना है और इसके लिए कुछ खाना ज़रूरी है और दूसरी अहम बात ये है की रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया : सेहरी खाया करो क्योंकि सेहरी खाने में बरकत है

Que: सेहरी क्यों महत्वपूर्ण है?

Ans: सेहरी एक रोजेदार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया: सेहरी खाया करो क्योंकि सेहरी खाने में बरकत है और दुसरी जगह फ़रमाया : हमारे और अहले-किताब के रोज़ों में सेहरी खाने का फ़र्क़ है। इस लिए सेहरी खाया करो !

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