रमज़ान के मुबारक महीना ख़त्म होने के बाद अल्लाह सुब्हान व ताआला ने अपने बंदों के लिए एक अज़ीम तोहफ़ा रखा है — शव्वाल के 6 रोज़े। बहुत से लोग इसकी अहमियत से अंजान रहते हैं,जबकि इसकी फ़ज़ीलत इतनी बड़ी है कि इसे रखने वाले को पूरे साल के रोज़े का सवाब मिलता है।
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Shawwal ke 6 roze – Ek chhoti ibadat, bada ajar |
शव्वाल के 6 रोज़े क्या हैं?
शव्वाल, रमज़ान के बाद आने वाला महीना है।इस महीने में ईद-उल-फित्र के बाद 6 रोज़े रखना सुन्नत है।
ये रोज़े फर्ज़ नहीं बल्कि नफ़्ल हैं, लेकिन इनका सवाब बहुत ज़्यादा है।पूरे साल का अजर
नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से ये साबित है कि Shawwal ke 6 Roze रखने से पूरे साल का अजर मिलता है।
अबु अय्यूब अंसारी रज़ि अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया, ”जिस ने रमज़ान अल मुबारक के रोज़े रखने के बआ़द Shawwal ke 6 Roze रखे तो ये ऐसा है जेसे के उसने पूरे साल के रोज़े रखे हों।(सही मुस्लिम (किताब अल-सौंम) [006:2614]Shawwal ke 6 roze rakhne ka Tareeqa watch video
नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इसकी शरह और तफ़सीर इस तरह ब्यान फरमाई हैं की जिसने ईदुल फ़ितर के बआ़द Shawwal ke 6 Roze रखे उसके पूरे साल के रोज़े हैं। (जो कोई नेकी करता है उसे उसका अजर दस गुना मिलेगा)।
पूरे साल के रोज़ों का सवाब कैसे मिलता है?
इस बात को समझना बहुत ज़रूरी है- एक नेकी का सवाब = 10 गुना
- रमज़ान के 30 रोज़े = 300 रोज़े
- शव्वाल के 6 रोज़े = 60 रोज़े
यह अल्लाह की बहुत बड़ी रहमत है।
नेकियों का दस गुना बढ़ जाना
रिवायत मैं हैं कि अल्लाह तआला एक नेकी को दस गुना करता है लिहाज़ा रमज़ानुल मुबारक का महीना दस महीनो के बराबर हुआ और 6 दिनो की रोज़े साल को पूरा करते है।(सुनन निसाई, सुनन इब्ने माजा, देखे सहीह अल तरग़ीब वा अल तारहिब (421\1)
और इब्ने ख़ुज़ैमा ने मुंदरजा ज़ेल अल्फ़ाज़ के साथ रिवायत किया है: रमज़ान उल मुबारक के रोज़े दस गुना और शव्वाल के 6 रोज़े दो माह के बराबर हैं तो इस तरह पूरे साल के रोज़े हुए हैं।
इमाम हंबल और शफ़ई इकराम ने तशरीह की हैं की:
रमज़ान उल मुबारक के बआ़द Shawwal ke 6 Roze रखना पूरे एक साल के फ़र्ज़ी रोज़ो के बराबर हैं वर्ना तो अमुमी तौ़र पर नफ़ली रोज़ो का अजरो सवाब ज़्यादा होना सबित है क्योंकि एक नेकी दस के बराबर हैं।
🗓️ शव्वाल के रोज़े कब रखें?
- ईद के दिन रोज़ा रखना हराम है
- ईद के बाद किसी भी दिन से शुरू कर सकते हैं
- 6 रोज़े लगातार या अलग-अलग भी रख सकते हैं
“ये दुरुस्त है कि कोई शख़्स शव्वाल के 6 रोज़े रखे लगातार या अलग-अलग।"
{नूर अला दर्ब नं 376}
शव्वाल के रोज़ों की फ़वाईद और हिकमत
Shawwal ke 6 Roze रखने का अहम फवाइद मैं ये भी शामिल हैं की ये रोज़े रमज़ान उल मुबारक मैं रखे गए रोज़ो की कमी ओ बेशी और नुक़्स को पूरा करते है और उसके ऐवज़ में है क्योंकि रोज़ेदार से कमी ओ बेशी हो जाती है और गुनाह भी सरज़द हो जाते हैं जो की उसके रोज़ो मैं साल्बी पहलु रखता है।
- रमज़ान के बाद भी इबादत का सिलसिला जारी रहता है
- नफ़ली इबादत से अल्लाह की नज़दीकी हासिल होती है
- गुनाहों की माफी का ज़रिया
- सब्र और परहेज़गारी यानी नफ़्स को कंट्रोल करने की ट्रेनिंग
जरूरी मसले (Important Points)
💠 क़ज़ा रोज़े पहले या शव्वाल के?
अगर रमज़ान के रोज़े बाकी हैं, तो पहले उन्हें पूरा करना बेहतर है।
💠 नीयत कैसे करें?
दिल में नीयत करना ही काफी है:
👉 “मैं शव्वाल के नफ़्ल रोज़े रख रहा/रही हूँ”
💠 क्या औरतों के लिए भी यही हुक्म है?
जी हाँ, मर्द और औरत दोनों के लिए इसका सवाब बराबर है।
आम गलतियां
- ♦️ सिर्फ रमज़ान में इबादत करना और बाद में छोड़ देना
- ♦️ शव्वाल के रोज़ों को अहमियत न देना
- ♦️ टालते-टालते पूरा महीना खत्म कर देना
Conclusion:
शव्वाल के 6 रोज़े एक छोटी सी इबादत लगते हैं, लेकिन इनका सवाब बहुत बड़ा है। यह अल्लाह का एक ख़ास ईनाम है जो हमें रमज़ान के बाद भी इबादत में जोड़े रखता है।👉 अगर हम ये 6 रोज़े रख लें, तो अल्लाह हमें पूरे साल के रोज़ों का सवाब देता है।
इसलिए इस सुनहरे मौके को हाथ से न जाने दें।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Que. क्या शव्वाल के रोज़े फर्ज़ हैं?
नहीं, ये नफ़्ल हैं लेकिन बहुत ज़्यादा सवाब वाले हैं।
Que. क्या 6 रोज़े लगातार रखना जरूरी है?
नहीं, आप इन्हें अलग-अलग भी रख सकते हैं।
Que. अगर बीच में गैप हो जाए तो?
कोई दिक्कत नहीं, बाद में पूरे कर सकते हैं।
Que. क्या क़ज़ा और शव्वाल के रोज़े साथ रख सकते हैं?
इसमें विद्वानों के बीच मतभेद है, बेहतर है अलग-अलग रखें।

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