Andheron Ke Baad Ujala – Umeed Aur Tawakkul Ka Paigham

इंसान की ज़िंदगी में कभी ऐसे भी वक़्त आते हैं जब सब कुछ छिन जाता है, उम्मीदें दम तोड़ने लगती हैं, और हालात यूँ महसूस होते हैं जैसे कभी बेहतर नहीं होंगे। लेकिन याद रखें "हर रात के बाद एक नया दिन उदय होता है, हर ख़ज़ाँ के बाद बहार आती है, और हर मुसीबत के बाद राहत मुक़द्दर बनती है" बशर्ते कि अल्लाह पर सच्चे दिल से यक़ीन और उम्मीद हो !

ज़िंदगी एक लगातार बदलते रहने वाली हक़ीक़त है, जहाँ खुशियाँ और ग़म, आसानियाँ और मुश्किलात एक साथ चलती हैं। हर इंसान की ज़िंदगी में ऐसे लम्हे आते हैं जब वह मायूसी, तकलीफ़ और आज़माइशों में घिर जाता है। उसे यूँ महसूस होता है जैसे अंधेरा कभी खत्म नहीं होगा और रोशनी का कोई इमकान बाकी नहीं रहा। मगर हक़ीक़त यह है कि Andheron ke Baad Ujala ज़रूर होता है! हर रात के बाद एक नया दिन उदय होता है, हर ख़ज़ाँ के बाद बहार आती है, और हर मुसीबत के बाद राहत मुक़द्दर बनती है।

Zindagi ki Shuruwaat kaheen se bhi ho sakti hai

Andheron ke baad roshni ka paigham aur umeed

 अल्लाह तआ'ला ने इंसान को सब्र, तवक्कुल और उम्मीद के ज़रिए इन आज़माइशों का सामना करने का सबक़ दिया है। यही वह यक़ीन है जो मुश्किलात के तूफान में इंसान के लिए चिराग़-ए-राह बनता है। और ये Andheron ke Baad Ujala बन कर आता है। 

    पतझड़ के बाद बहार का आना यक़ीनी है

    जब पतझड़ का मौसम आता है, तो दरख़्त अपने सारे पत्ते खो देता है। हर तरफ़ सूखे पत्तों की सरसराहट सुनाई देती है, जैसे ज़िंदगी पज़मुर्दा हो गई हो। लेकिन दरख़्त मायूस नहीं होता, वह सब्र का दामन थामे अपनी जगह खड़ा रहता है। वह जानता है कि यह वक़्त हमेशा के लिए नहीं है। और फिर एक दिन, बहार की आमद होती है, कलियाँ खिलती हैं, दरख़्त हरे-भरे हो जाते हैं और ज़िंदगी फिर से मुस्कुराने लगती है।

    नसीहत

    इंसान की ज़िंदगी में भी ऐसे वक़्त आते हैं जब सब कुछ छिन जाता है, उम्मीदें दम तोड़ने लगती हैं, और हालात यूँ महसूस होते हैं जैसे कभी बेहतर नहीं होंगे। लेकिन अगर दरख़्त ख़ज़ाँ के बाद बहार की उम्मीद रख सकता है, तो हम क्यों नहीं? मुश्किलात के वक़्त सब्र कीजिए, इस्तिक़ामत इख़्तियार कीजिए, और यक़ीन रखिए कि अल्लाह हर अंधेरी रात के बाद एक रौशन सुबह लेकर आता है यानी Andheron ke Baad Ujala आता है!

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    "मुश्किल वक्त में इंसान को सब्र और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। हर कठिनाई के बाद आसानी आती है और हर अंधेरी रात के बाद सवेरा होता है।,

    अंधेरी रात के बाद रोशनी का ज़हूर

    बादल जब गहरे और घने हो जाते हैं, तो ज़मीन पर अंधेरा छा जाता है। यूँ लगता है जैसे रोशनी कभी वापस नहीं आएगी, जैसे अंधेरों की हुकूमत हमेशा के लिए है। मगर वही बादल जब बरसते हैं, तो ज़मीन को सेराब कर देते हैं, फ़िज़ा में ताज़गी भर देते हैं, और फिर सूरज निकल आता है। कुछ ही देर बाद, आसमान पर एक ख़ूबसूरत क़ौस-ए-क़ज़ह (🌈) उभर आती है, जो इस बात की गवाही देती है कि अंधेरों के बाद रोशनी ज़रूर आती है।

    नसीहत

    ज़िंदगी में कभी ऐसा वक़्त आ सकता है जब हर तरफ़ अंधेरा ही अंधेरा नज़र आए, और यूँ लगे कि यह हालात कभी नहीं बदलेंगे। मगर याद रखिए! हर मुश्किल के बाद आसानी है, हर परेशानी के बाद राहत है। जैसे बारिश के बाद सूरज चमकता है, वैसे ही हर आज़माइश के बाद अल्लाह की रहमत बरसती है। बस थोड़ा सब्र कीजिए, यक़ीन रखिए, और अल्लाह से दुआ कीजिए, वही बेहतरीन रास्ता निकालेगा।

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    अंधेरों में छुपी एक नई शुरुआत 

    एक छोटा सा बीज जब ज़मीन में दब जाता है, तो बा़ज़ाहिर ऐसा लगता है कि उसका वुजूद खत्म हो गया। वह मिट्टी के नीचे छुप जाता है, रोशनी से महरूम हो जाता है, और एक अनजान सफ़र पर निकल पड़ता है। मगर हक़ीक़त में, वह ज़मीन की तारीकी में परवान चढ़ रहा होता है। वह पानी और रोशनी की तलाश में अपनी जड़ें मजबूत करता है, और फिर एक दिन ज़मीन को चीर कर बाहर निकल आता है, एक नया पौधा बनकर।

    नसीहत

    हमारी ज़िंदगी में भी बा़ज़ औक़ात हमें मुश्किलात की ज़मीन में दब जाना पड़ता है। हम खुद को तन्हा, कमज़ोर और बेबस महसूस करते हैं। लेकिन याद रखें, यही मुश्किलात हमें मजबूत करती हैं, यही परेशानियाँ हमें एक बेहतर इंसान बनने का मौक़ा देती हैं। अगर बीज ज़मीन की तारीकी से निकल कर एक तानावार दरख़्त बन सकता है, तो हम क्यों नहीं? हर परेशानी को एक नए आग़ाज़ का ज़रिया बनाईए और आगे बढ़ते रहिए।

    "जब भी ज़िंदगी में मुश्किलात आएँ, तो यह याद रखिए कि हर दर्द के बाद सुकून, हर आज़माइश के बाद राहत और हर तारीकी के बाद रोशनी ज़रूर आती है। अल्लाह अपने बंदों पर कभी ज़रूरत से ज़्यादा बोझ नहीं डालता, और वह हमेशा उनके साथ होता है,

    चाँद की घटती-बढ़ती रोशनी

    चाँद की रोशनी कभी मुकम्मल नहीं रहती। कभी वह हिलाल की सूरत में नज़र आता है, कभी निस्फ़ और कभी मुकम्मल। मगर यह कमी और बेशी उसकी चमक को कम नहीं करती। वह अपने मुक़र्रर वक़्त पर दुबारा चमक उठता है, अपनी रोशनी बिखेरता है, और हमें सिखाता है कि ज़िंदगी में उतार-चढ़ाव आते हैं, मगर यह आरज़ी होते हैं।

    नसीहत

    ज़िंदगी में अगर आज हम कामयाब नहीं हैं, तो इसका यह मतलब नहीं कि हमेशा ऐसा ही रहेगा। जैसे चाँद अपनी रोशनी दुबारा हासिल कर लेता है, वैसे ही हमारी ज़िंदगी में भी अच्छे दिन ज़रूर आएँगे। अपनी नाकामियों को हौसला शिकनी का सबब न बनने दें, बल्कि उनसे सीख कर आगे बढ़ें, क्योंकि अल्लाह की मदद हमेशा उनके साथ होती है जो मेहनत और सब्र के साथ आगे बढ़ते हैं।

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    कोई मुसीबत हमेशा नहीं रहती

    Zindagi ki Shuruwaat kabhi Bhi ho sakti hai
    Zindagi ki shuruwat kaheen bhi ho sakti hai 

    ज़िन्दगी की शुरुआत कभी भी कहीं से भी हो सकती है ! दुनिया में कोई भी तकलीफ़, कोई भी परेशानी या मुसीबत हमेशा के लिए नहीं होती। कोई बीमारी ऐसी नहीं जिसका इलाज न हो, कोई आज़माइश ऐसी नहीं जो खत्म न हो सके। बीमार सेहतयाब हो जाते हैं, मुश्किलात टल जाती हैं, बिछड़े हुए दुबारा मिल जाते हैं, और बुरा वक़्त भी एक दिन खत्म हो जाता है। बस ज़रूरत है तो सब्र की, रब पर यक़ीन की, अल्लाह पर तवक्कुल की, इस्तिक़ामत की और उम्मीद की। और वो भी बिल्कुल ख़ालिस दिल से.

    नसीहत

    जब भी ज़िंदगी में मुश्किलात आएँ, तो यह याद रखिए कि हर दर्द के बाद सुकून, हर आज़माइश के बाद राहत और हर तारीकी के बाद रोशनी ज़रूर आती है। अल्लाह अपने बंदों पर कभी ज़रूरत से ज़्यादा बोझ नहीं डालता, और वह हमेशा उनके साथ होता है जो उस पर भरोसा करते हैं। इस लिए ना-उम्मीद न हों, क्योंकि बुरा वक़्त हमेशा के लिए नहीं रहता।

    मायूसी गुनाह है, अल्लाह की रहमत से नाउम्मीद न हों

    ज़िंदगी की राहों में मुश्किलात और आज़माइशें आती रहती हैं, मगर नाउम्मीदी को दिल में जगह देना खुद पर ज़ुल्म करने के बराबर है। जब अल्लाह ने फ़रमाया है:

    وَلَا تَايۡـئَسُوۡا مِنۡ رَّوۡحِ اللّٰهِ‌ؕ اِنَّهٗ لَا يَايۡـئَسُ مِنۡ رَّوۡحِ اللّٰهِ اِلَّا الۡقَوۡمُ الۡكٰفِرُوۡنَ ۞

    > तरजुमा: "और अल्लाह की रहमत से मायूस न हो। बेशक, अल्लाह की रहमत से सिर्फ़ काफ़िर लोग ही नाउम्मीद होते हैं।" (सूरह यूसुफ़: 87)

    तो फिर हम नाउम्मीद क्यों हों? हमारा रब सबसे ज़्यादा मेहरबान है, वह मुश्किल के बाद आसानी देता है, रात के बाद दिन को त़लूअ करता है, ख़ज़ाँ के बाद बहार लाता है। अगर आज अंधेरा है, तो कल रोशनी भी होगी। अगर आज दुख है, तो कल ख़ुशी भी आएगी।

    नसीहत

    मायूसी को अपने दिलो-दिमाग़ में जगह मत दीजिए, क्योंकि यह ईमान की कमज़ोरी की अलामत है। अल्लाह पर भरोसा रखिए, दुआ कीजिए, और अपनी कोशिश जारी रखिए। यक़ीन रखिए कि अल्लाह की रहमत किसी भी वक़्त, किसी भी रास्ते से आपके लिए आसानियाँ पैदा कर सकती है। क्योंकि यक़ीनन:

    "मुमकिन नहीं कि शाम-ए-अलम की सहर न हो!"

    इतना भी नाउम्मीद दिल कम-नज़र न हो,

    मुमकिन नहीं कि शाम-ए-अलम की सहर न हो।

    "जब एक बीज मिट्टी में दब जाता है, तो ऐसा लगता है कि उसका वजूद खत्म हो गया, लेकिन असल में वह मिट्टी के नीचे मजबूत हो रहा होता है। उसी तरह, इंसान भी मुश्किलों से गुज़रकर मजबूत बनता है।۔"

    Conclusion:

    मायूसी दरहक़ीक़त शैतान का एक हथियार है, जो इंसान को कमज़ोर करने और अल्लाह की रहमत से दूर करने की कोशिश करता है। मगर एक मोमिन कभी नाउम्मीद नहीं होता, क्योंकि उसका ईमान है कि अल्लाह की रहमत हर चीज़ से वसीअ है। मुश्किलात आरज़ी होती हैं, दुख हमेशा नहीं रहते, और आज़माइशों के बाद आसानी ज़रूर आती है। Andheron ke Baad Ujala ज़रूर आता है! हमें चाहिए कि हम हर हाल में सब्र, तवक्कुल और उम्मीद का दामन थामे रखें, क्योंकि यक़ीनन:
    "मुमकिन नहीं कि शाम-ए-अलम की सहर न हो!"

    🌸✨🌿 By~ Mohibz Tahiri ~ 🌿✨🌸
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    FAQs:


    सवाल: ज़िंदगी में मुश्किलों का सामना करते वक्त इंसान को क्या करना चाहिए?
    जवाब: मुश्किल वक्त में इंसान को सब्र और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। हर कठिनाई के बाद आसानी आती है और हर अंधेरी रात के बाद सवेरा होता है।

    सवाल: पेड़ पतझड़ के बाद फिर से हरा-भरा कैसे हो जाता है?
    जवाब: पतझड़ के मौसम में पेड़ अपने सारे पत्ते खो देता है, लेकिन वह मायूस नहीं होता। वह अपनी जड़ों को मजबूत रखता है और जब बसंत आती है, तो फिर से हरा-भरा हो जाता है।

    सवाल: अल्लाह की रहमत से मायूस होना क्यों गलत है?
    जवाब: क्योंकि अल्लाह सबसे ज्यादा रहमत वाला है। उसने खुद कुरआन में कहा है कि उसकी रहमत से सिर्फ काफ़िर लोग मायूस होते हैं। इसलिए, हमें हमेशा उम्मीद रखनी चाहिए।

    सवाल: जिंदगी के उतार-चढ़ाव से हमें क्या सीख मिलती है?
    जवाब: हमें यह सीख मिलती है कि कोई भी तकलीफ हमेशा के लिए नहीं होती। जिस तरह चाँद अपनी रौशनी खोने के बाद फिर से चमकता है, वैसे ही हमारी जिंदगी में भी अच्छे दिन जरूर आते हैं।

    सवाल: बीज का उदाहरण इंसानी ज़िंदगी से कैसे जुड़ता है?
    जवाब: जब एक बीज मिट्टी में दब जाता है, तो ऐसा लगता है कि उसका वजूद खत्म हो गया, लेकिन असल में वह मिट्टी के नीचे मजबूत हो रहा होता है। उसी तरह, इंसान भी मुश्किलों से गुज़रकर मजबूत बनता है।

    सवाल: इंसान को मायूसी से कैसे बचना चाहिए?
    जवाब: इंसान को अल्लाह की रहमत पर भरोसा रखना चाहिए, दुआ करनी चाहिए, और हिम्मत के साथ मेहनत करनी चाहिए। कोई भी परेशानी हमेशा के लिए नहीं रहती।

    सवाल: क्या मुश्किल वक्त हमें मजबूत बना सकता है?
    जवाब: हाँ, मुश्किल वक्त हमें और ज्यादा मजबूत बनाता है, क्योंकि हर तकलीफ हमें सीखने और आगे बढ़ने का मौका देती है।
    "मायूसी को अपने दिलो-दिमाग़ में जगह मत दीजिए, क्योंकि यह ईमान की कमज़ोरी की अलामत है। अल्लाह पर भरोसा रखिए, दुआ कीजिए, और अपनी कोशिश जारी रखिए। यक़ीन रखिए कि अल्लाह की रहमत किसी भी वक़्त, किसी भी रास्ते से आपके लिए आसानियाँ पैदा कर सकती है


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