आज के दौर में गैर-मुस्लिम त्योहार दुनिया भर में मार्केटिंग और ट्रेंड्स की वजह से आम हो चुके हैं।इस दौर में अलग–अलग धर्मों और संस्कृतियों के मेल-जोल के कारण यह सवाल अक्सर उठता है कि Christmas Wish Ya Celebrate karna kaisa hai? क्या मुसलमानों के लिए क्रिसमस मनाना या Merry Christmas कहना सही है? कई मुसलमान जानकारी के अभाव में या सामाजिक दबाव के चलते ऐसे त्योहारों में शामिल हो जाते हैं जिनकी नींव एक ऐसे अक़ीदें पर रखी गई है जो इस्लाम की तौहीद के बिल्कुल खिलाफ है।
इस्लाम में अल्लाह की वहदानियत (Oneness of Allah) की हिफाज़त सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। कुरान और हदीस साफ बताती हैं कि किसी ऐसे त्योहार की ताइद (समर्थन) करना जिसमें अल्लाह के लिए बेटा मानने जैसा गलत और गुमराह करने वाला aqeedah शामिल हो, बिल्कुल जायज़ नहीं।
इस लेख Christmas Wish Ya Celebrate karna kaisa hai? में हम क्रिसमस के हुक्म, कुरान और हदीस की दलीलों, और उलमा व फुकहा के स्पष्ट बयान को आसान भाषा में पेश करेंगे, ताकि हर मुसलमान सही और पक्की राह को पहचान सके।
इस्लामी नज़रिये से Christmas की हक़ीक़त
Christmas (25 December) ईसाइयों का धार्मिक त्योहार है, जो हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को “ईश्वर का बेटा” मानकर मनाया जाता है।जबकि इस्लाम के अक़ीदे में:
हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम अल्लाह के रसूल हैं न वो ख़ुदा हैं, न ख़ुदा के बेटे
👉 इसलिए Christmas मनाना या इसकी मुबारकबाद देना, इस्लामी अक़ीदे और इस्लाम की बुनियादी शिक्षा तौहीद के खिलाफ है। यह मसअला सिर्फ़ “खुशी” का नहीं, बल्कि एक दूसरे मज़हब के अक़ीदे की ताईद का भी है।
📖गैर-इस्लामी अक़ीदे से मुतल्लिक़ अल्लाह का फरमान
- गैर-इस्लामी अक़ीदे से दूरी“तुम उनके रास्ते पर न चलो…”📖 (सूरह अल-जासिया 45:18)
- शिर्क से सख़्त मनाही“उन्होंने अल्लाह के सिवा अपने रहबरों और ईसा बिन मरयम को रब बना लिया।”📖 (सूरह अत-तौबा 9:31)
- ईसा अलैहिस्सलाम के बारे में ग़लत अक़ीदा
“काफ़िर हो गए वो लोग जो कहते हैं कि मसीह ही अल्लाह है।”📖 (सूरह अल-माइदा 5:72)
गैर-मुस्लिम मज़हबी रस्मों में शामिल होने की मनाही
अल्लाह तआला फ़रमाता है:
“रहमान के बंदे वो हैं जो ज़ूर (झूठ, कुफ़्र और बटील) की मजलिसों में शरीक नहीं होते।”
(सूरह फ़ुरक़ान 25:72)
उलमा के नज़दीक “ज़ूर” से मुराद गैर-मुस्लिम मज़हबी त्यौहारों में शामिल होना भी है।उनकी मज़हबी ख़ासियत की ताईद करना मना है
अल्लाह तआला फ़रमाता है:
“गुनाह और ज़्यादती के कामों पर एक-दूसरे की मदद न करो।”(सूरह मायदा 5:2)
Christmas मनाना या मनवाना — दोनों ईसाइयों के गलत अक़ीदे की ताईद में आता है।ईसा अलैहिस्सलाम के बारे में इस्लाम का असल अक़ीदा
“मसीह (ईसा) मरयम के बेटे सिर्फ़ एक रसूल हैं।”(सूरह मायदा 5:75)
1️⃣ “जिस कौम की मुशाबहत करे…”
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:जो जिस कौम की मुशाबहत (नकल) करेगा, वह उन्हीं में से होगा।
(अबू दाऊद 4031)
Christmas के पेड़, टोपी, लाइट्स, गिफ्ट्स — यह सब मुसाबहत (नकल) में आता है।
2️⃣ रसूल ﷺ ने सिर्फ़ दो ईदें क़ायम की हैं
अल्लाह ने तुम्हें इन दोनों (जाहिलियत के त्योहारों) के बदले दो बेहतर दिन दिए हैं: ईदुल फ़ित्र और ईदुल अज़्हा।”(अबू दाऊद 1134)मुसलमानों की ईदें मुकम्मल हैं; इनके अलावा नई ईदें इजाद करना या दूसरों की ईदें मनाना शरीअत में नहीं।
Christmas wish करना (Merry Christmas कहना) — मुसलमानों के लिए कैसा?
क्रिसमस मनाना या “Merry Christmas” कहना, इस्लामिक दृष्टि से सही नहीं है। क्योंकि यह ऐसे aqeedah की ताईद (समर्थन) है जो तौहीद के खिलाफ जाता है और अल्लाह की शान में बड़ी गुस्ताख़ी को शामिल करता है।♦️Merry Christmas क्यों नहीं कहना चाहिए?
"Merry Christmas" जैसे शब्दों से बचना चाहिए, और खास तौर पर इसको wish करने से रोकना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा मतलब उस गलत aqeedah को मानना है कि — "अल्लाह ने बेटा जन्म दिया" (नऊज़ुबिल्लाह)। यह बात इस्लाम में खुला कुफ़्र और शरीक (शिर्क) है।♦️ईसाइयों का गलत aqeedah क्या है?
ईसाइयों का यह aqeedah है कि ईसा अलैहिस्सलाम — नऊज़ुबिल्लाह — अल्लाह तआला के बेटे हैं।
वे जिस दिन क्रिसमस मनाते हैं, उनके अनुसार यह वह दिन है जब “अल्लाह ने बेटा पैदा किया था” (नऊज़ुबिल्लाह)। यह aqeedah इस्लाम में पूरी तरह से रद्द और बुनियादी तौर पर गलत है।
♦️मुसलमान की ओर से क्रिसमस की बधाई देना क्या दर्शाता है?
जब कोई मुसलमान क्रिसमस की बधाई देता है या दूसरों की खुशी में शामिल होता है, तो इसका मतलब यह निकलता है कि वह इस गलत aqeedah से सहमत है —कि अल्लाह ने बेटा पैदा किया और ईसा अलैहिस्सलाम अल्लाह के बेटे हैं (नऊज़ुबिल्लाह)।
इसलिए यह काम ईमान के लिए बेहद नुकसानदेह और बिल्कुल नाजायज़ है।
♦️25 दिसंबर को उनकी खुशी में शामिल होना क्यों गलत है?
जो लोग 25 दिसंबर को काफ़िरों के साथ देते हैं, उन्हें बधाई देते हैं या उनकी खुशियों में रंग भरते हैं—
उन्हें चाहिए कि एक बार अपने रब की आयात पढ़ें। अगर पढ़कर भी समझ न आए तो अल्लाह से हिदायत की भीख मांगें।
सूरह इख़्लास का साफ़ और अंतिम ऐलान
सूरह इख़्लास में अल्लाह तआला ने तौहीद को बिल्कुल साफ़ कर दिया:
- कह दीजिए: वह अल्लाह एक ही है।
- अल्लाह बे-नियाज़ है।
- न वह पैदा हुआ, न उसने किसी को पैदा किया।
- और न कोई उसका हमसर है।
अगर हम इस सूरह को पढ़कर भी बात न समझें तो सच में हिदायत सिर्फ़ अल्लाह के पास है। यह सुरह साफ़ तौर पर साबित करती है कि अल्लाह के लिए बेटा मानना सबसे बड़ा झूठ और गुमराही है।
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हिदायत अल्लाह के हाथ में है
अगर इस किताब (कुरान) को पढ़कर भी किसी को समझ नहीं आती, तो वह कभी सही राह पर नहीं आ सकता। इंसान सिर्फ समझा सकता है, लेकिन हिदायत देना सिर्फ अल्लाह का काम है।
कुरान में अल्लाह ने साफ़ कहा:
"आप कह दीजिए, आप सिर्फ समझाने वाले हैं, हिदायत देने वाला मैं हूँ—जिसे चाहूँ हिदायत दूँ और जिसे चाहूँ गुमराह कर दूँ।"
25 दिसंबर—अल्लाह की शान में बड़ी गुस्ताख़ी
25 दिसंबर को ऐसा aqeedah मनाया जाता है जिसमें रब-ए-कायनात की शान में बहुत बड़ी गुस्ताख़ी की जाती है।
क्रिसमस मनाने वाले, और उसे बधाई देने वाले—मानो यह स्वीकार कर रहे हैं कि अल्लाह की बीवी और बेटा है (नऊज़ुबिल्लाह)।
यह बात इतनी बड़ी है कि—
इस अकीदः और गुस्ताख़ी से मुतल्लिक़ क़ुरआन में अल्लाह का ग़ज़ब भरा फ़रमान
- 💠وَقَالُوا اتَّخَذَ الرَّحْمٰنُ وَلَدًا
“उन्होंने कहा कि रहमान ने औलाद बनाई।” - 💠لَقَدْ جِئْتُمْ شَيْئًا إِدًّا
“तुमने बहुत बुरी और भयानक बात कही है।” - 💠تَكَادُ السَّمَاوَاتُ يَتَفَطَّرْنَ مِنْهُ وَتَنْشَقُّ الْأَرْضُ وَتَخِرُّ الْجِبَالُ هَدًّا
“करीब है कि आसमान फट पड़ें,ज़मीन टुकड़े हो जाए,और पहाड़ ढहकर गिर पड़ें…” - 💠أَنْ دَعَوْا لِلرَّحْمٰنِ وَلَدًا
“क्योंकि उन्होंने रहमान के लिए औलाद ठहराई।” - 💠وَمَا يَنْبَغِي لِلرَّحْمٰنِ أَنْ يَتَّخِذَ وَلَدًا
“रहमान की शान के लायक नहीं कि वह औलाद रखे।” - 💠إِنْ كُلُّ مَنْ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ إِلَّا آتِي الرَّحْمٰنِ عَبْدًا
“आसमान और ज़मीन में जो भी है,
सब अल्लाह के बन्दे बनकर ही उसके सामने हाज़िर होंगे।”
📚 उलमा व फुकहा के अक़वाल
1️⃣ इब्ने तैमिया रहिमहुल्लाह
- गैर-मुस्लिमों के त्योहारों में शरीक होना, उनकी ताईद करना और उनकी नकल करना हराम है।”(इक़्तिदा अस सिरात अल मुस्तक़ीम)
2️⃣ इब्नुल क़य्यिम रहिमहुल्लाह
- उनकी ईदों को मानना, उनमें शामिल होना, या उन्हें बधाई देना — सब नाजायज़ है।”
(अहकाम अहल जिम्मा)
3️⃣ इमाम नववी रहिमहुल्लाह :
- “काफ़िरों के धार्मिक शिआर में शरीक होना या उनकी मुबारकबाद देना जायज़ नहीं।”
4️⃣ जमहूर फुकहा (हंबली, मालिकी, शाफेई, हनफी)
- सभी के नज़दीक Christmas पर “Merry Christmas” कहना, केक काटना या सेलिब्रेशन में शामिल होना —
मक़रूह तहरीमी / हराम है क्योंकि यह उनके गलत अक़ीदे की ताईद है।
🎁 क्या सिर्फ़ “गिफ्ट” देना या लेना जायज़ है?
अगर गिफ्ट मज़हबी ताईद के तौर पर हो → हरामअगर सिर्फ़ इंसानी सदभावना (Non-religious) हो → कुछ उलमा के बीच इख़्तिलाफ़ है,
लेकिन हुक्म यही कि Christmas से जुड़ी निशानियों से बचना बेहतर और सुरक्षित है।
Social Pressure की वजह से क्या करना चाहिए?
अगर ऑफिस, स्कूल, या सोसायटी में जबरदस्ती माहौल हो, तो मुसलमान:
- शीरिन लहजे में “We don't celebrate religious holidays, but thank you” कह सकता है।
- तटस्थ रहें, लेकिन सेलिब्रेशन में शामिल न हों।
- किसी को ठेस पहुंचाए बिना अपना मज़हबी मौक़िफ़ वाजेह रखें।
Final Verdict — इस्लामी फ़ैसला
🌟 नतीजा
कुरान ने बार-बार यह बात स्पष्ट कर दी है कि अल्लाह बे-नियाज़ है, न वह किसी से पैदा हुआ और न किसी को पैदा किया, और ऐसे aqeedah को स्वीकार करना ईमान के ख़िलाफ़ है। उलमा और फुकहा भी इस पर मुत्तफ़िक़ हैं कि गैर-मुस्लिमों के धार्मिक त्योहारों में भाग लेना या उन्हें बधाई देना उनके aqeedah की ताइद करने जैसा है—जो एक मुसलमान के लिए बेहद नुकसानदेह है।
इसलिए हर मुसलमान का फर्ज़ है कि वह अपने ईमान की हिफाज़त करे, तौहीद को सबसे ऊपर रखे, और अच्छे अख़लाक के साथ रहते हुए भी ऐसे धार्मिक त्योहारों से पूरी तरह दूरी बनाए।
हिदायत अल्लाह के हाथ में है—हमें चाहिए कि हम हमेशा अल्लाह से सच्ची हिदायत, सही समझ और पुख़्ता ईमान की दुआ करते रहें।
❗ Christmas मनाना,
❗ Merry Christmas कहना,
❗ मुबारकबाद देना,
❗ खशियाँ शेयर करना —
सब एक ऐसे अक़ीदे की ताईद है जो सीधा-सीधा तौहीद के खिलाफ़ और अल्लाह की शान में गुस्सताख़ी है। इसलिए एक मुसलमान के लिए Christmas के हर मज़हबी तत्व से दूर रहना ज़रूरी है।
FAQs
1️⃣ क्या मुसलमान Christmas सेलिब्रेट कर सकते हैं?
नहीं। Christmas एक ईसाई मज़हबी त्योहार है जो इस्लाम के तौहीदी अक़ीदे के खिलाफ़ है। इसलिए इसका सेलिब्रेशन करना मुसलमानों के लिए जायज़ नहीं।
2️⃣ क्या “Merry Christmas” कहने की अनुमति है?
उलमा की आम राय है कि "Merry Christmas" कहना ईसाइयों के गलत अक़ीदे (Jesus को God का बेटा मानना) की ताईद है, जो नाजायज़ है।
3️⃣ ऑफिस या स्कूल में Christmas पार्टी में जाना कैसा है?
मज़हबी रस्मों वाली पार्टी में जाना मना है।
अगर माहौल पूरी तरह मज़हबी हो — तो जाना जायज़ नहीं।
शालीनता से मना करना बेहतर है।
4️⃣ क्या Christmas के दिन गिफ्ट देना या लेना ठीक है?
अगर गिफ्ट Christmas के धार्मिक त्योहार का हिस्सा बनकर दिया जाए, तो यह जायज़ नहीं।
नॉर्मल दिनों जैसा गिफ्ट — अलग मामला है, लेकिन Christmas-लिंक्ड गिफ्ट से बचना बेहतर है।
5️⃣ क्या non-Muslims का एहतराम करते हुए सिर्फ सोशल लेवल पर शुभकामना दी जा सकती है?
इंसानी सद्भाव बनाए रखना ठीक है, लेकिन ऐसा कोई शब्द न बोला जाए जिससे उनके धार्मिक त्योहार की ताईद होती हो।
6️⃣ क्या कुरान और हदीस में गैर-मुस्लिम त्योहारों में शामिल होने की मनाही है?
हाँ। कई आयात और हदीसें गैर-मुस्लिम मज़हबी रस्मों की ताईद से रोकती हैं —
जैसे “Man tashabbaha bi qawmin fa huwa minhum”, और “La yash-hadoona az-zoor”.
7️⃣ मुसलमानों के लिए कौन-कौन सी ईदें मुकर्रर हैं?
इस्लाम में सिर्फ़ दो ईदें हैं:
ईद-उल-फितर और ईद-उल-अज़हा।
इनके अलावा कोई नई ईद या त्योहार बनाना सही नहीं।
کرسمس (Christmas) منانا مسلمانوں کے لیے کیسا ہے؟ — قرآن و سنت کی روشنی میں
کرسمس کیا ہے؟
یہ عقیدہ اسلام کے بنیادی اصول توحید کے سراسر خلاف ہے۔
لہٰذا یہ مسئلہ صرف خوشی کا نہیں، بلکہ دوسرے مذہب کے غلط عقیدے کی تائید کا ہے۔
👈 مسلمان کرسمس کیوں نہیں منا سکتے؟
علما کے مطابق:
- یہ عقیدہ شرک پر مبنی ہے
- اللہ کی ذات کی توہین ہے
- تیسری امت یعنی عیسائیوں کی مذہبی رسومات میں شامل ہونا منع ہے
- "Merry Christmas" کہنا ایسا ہے جیسے اُن کے عقیدے کی تصدیق کرنا
“25th december ko Rab kaynat ki shaan mein azeem gustaakhi ki jati hai… Christmas manane walon aur mubarakbad dene walon goya tasleem kar rahe hain ke Allah swt ki bhi biwi aur beta hai (Nawzubillah).”
قرآنِ مجید میں اس عقیدے سے متعلق فرمان
1. حضرت عیسیٰؑ کے بارے میں اسلامی عقیدہ
2. اللہ تعالیٰ کا بیٹا قرار دینے کی سخت تردید
3. کفر کے شعائر سے براءت
احادیثِ نبوی ﷺ کی روشنی میں
1. غیر مسلم اقوام کی مشابہت سے ممانعت
2. اسلامی تہواروں کی تخصیص
🔸 کرسمس منانا یا اس کی مبارکباد دینا کیسا عمل ہے؟
کرسمس منانا یا “Merry Christmas” کہنا اسلامی نقطۂ نظر سے درست نہیں، کیونکہ یہ ایسے باطل عقیدے کی تائید ہے جو توحید کے بلکل خلاف ہے اور اللہ کی شان میں کھلی گستاخی پر مبنی ہے۔
🔸 Merry Christmas کیوں نہیں کہا جا سکتا؟
🔸 عیسائیوں کا گمراہ کن عقیدہ کیا ہے؟
🔸 مسلمانوں کی طرف سے کرسمس کی مبارکباد دینے کا کیا مفہوم بنتا ہے؟
🔸 25 دسمبر کو ان کی خوشی میں شامل ہونا کیوں غلط ہے؟
🔸 سورہ اخلاص کی روشنی میں واضح فیصلہ
یہ آیات صاف اعلان کرتی ہیں کہ اللہ کے لیے بیٹا ماننا سب سے بڑا جھوٹ ہے۔
🔸 ہدایت صرف اللہ کے ہاتھ میں ہے
🔸 25 دسمبر — اللہ کی شان میں بڑی گستاخی کا دن
🔸 قرآنِ مجید میں اللہ تعالیٰ کا غضب بھرا فرمان
علما و فقہا کے اقوال
شیخ الاسلام ابنِ تیمیہ رحمہ اللہ
- غیر مسلموں کے تہواروں میں شریک ہونا، ان کی تائید کرنا اور ان کی مشابہت اختیار کرنا حرام ہے۔”(اقتضاء الصراط المستقیم)
- ان کی عیدوں کو تسلیم کرنا، انہیں مبارک دینا، ان میں شرکت کرنا — سب ناجائز ہے۔”(أحکام أهل الذمۃ)
امام نوویؒ
- کفار کی مشابہت اختیار کرنا ممنوع ہے، خصوصاً ان کے مذہبی شعار میں۔"
دارالافتاء (جمہور اہلِ علم)
- کرسمس کی مبارکباد دینا، اس میں شرکت کرنا یا اس دن خوشی منانا شرعاً ناجائز ہے کیونکہ یہ کفریہ عقائد کی تائید ہے۔
چاروں مذاہبِ فقہ (حنفی، مالکی، شافعی، حنبلی)تمام فقہا کے نزدیک:
- ♦️Merry Christmas کہنا
♦️کرسمس پارٹی میں شریک ہونا
♦️کیک کاٹنا یا لائٹس لگانا
👈 سب مکروہِ تحریمی یا حرام ہے، کیونکہ یہ دوسرے دین کی مذہبی شعار کی تائید ہے۔ ۔
🎁 کیا صرف ’گفٹ‘ دینا یا لینا جائز ہے؟
معاشرتی دباؤ (Social Pressure) کی صورت میں کیا کریں؟
اسلامی حکم (Final Verdict)
🌟 ایک نصیحت
⭐ خلاصہ
✅ FAQs
1️⃣ کیا مسلمان کرسمس منانے کی اجازت رکھتے ہیں؟
نہیں۔ کرسمس ایک خالص عیسائی مذہبی تہوار ہے جو اسلامی عقیدۂ توحید کے خلاف ہے، اس لیے اسے منانا جائز نہیں۔
2️⃣ کیا “Merry Christmas” کہنا درست ہے؟
اکثر علما کے نزدیک یہ لفظ کہنا عیسائی عقیدہ (عیسیٰ کو خدا کا بیٹا ماننا) کی تائید میں شمار ہوتا ہے، لہٰذا ناجائز ہے۔
3️⃣ آفیس یا اسکول کی Christmas پارٹی میں جانا کیسا ہے؟
اگر اس میں مذہبی رنگ ہو، نعرے ہوں، گانے ہوں یا مذہبی شعار ہوں —
تو اس میں شرکت کرنا جائز نہیں۔
نرمی سے معذرت کرنا بہتر ہے۔
4️⃣ کیا Christmas کے دن تحفہ دینا یا لینا جائز ہے؟
اگر تحفہ مذہبی تہوار کی مناسبت سے ہو تو ناجائز ہے۔
عام دنوں کی طرح نارمل گفٹ الگ معاملہ ہے، مگر کرسمس کا حصہ بننے سے بچنا بہتر ہے۔
5️⃣ کیا غیر مسلموں کا احترام کرتے ہوئے کوئی نیوٹرل جملہ کہا جا سکتا ہے؟
جی ہاں، احترام اپنی جگہ ہے، مگر ایسا جملہ نہ کہیں جس میں ان کے مذہبی عقیدے کی تائید شامل ہو۔
6️⃣ کیا قرآن و حدیث میں غیر مسلم تہواروں سے دور رہنے کا حکم ہے؟
جی ہاں۔ متعدد آیات اور احادیث اس بات سے روکتی ہیں کہ مسلمان غیر مسلم مذہبی رسومات میں شامل ہوں —
جیسے “من تشبہ بقوم فھو منھم” اور “لا يشهدون الزور”۔
7️⃣ اسلام نے مسلمانوں کیلئے کتنی عیدیں مقرر کی ہیں؟
اسلام میں صرف دو عیدیں مقرر ہیں:
عید الفطر اور عید الاضحی۔
ان کے علاوہ کوئی تیسری مذہبی عید نہیں۔

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