Christmas Wish Ya Celebrate karna kaisa hai?(Hindi/Urdu)

क्रिसमस मनाना या उसकी बधाई देना—अल्लाह की तौहीद के खिलाफ जाने वाला काम है। मुसलमान को चाहिए कि वह अपने ईमान की हिफाज़त करे, और किसी भी ऐसे aqeedah का हिस्सा न बने जिसमें अल्लाह की शान में गुस्ताख़ी शामिल हो।

Christmas Wish Ya Celebrate karna kaisa hai? — कुरान-ओ-सुन्नत व अक़वाल-ए-उलमा की रोशनी में

✍️ By: Mohib Tahiri |🕋 islamic article| Tauheed aur Christmas| Christmas aur Musalman| 25 December 🕰 Updt:21 Dec 2025
Islam me Christmas manane ka hukum Roman Hindi Quran o Hadees ki roshni me Christmas ka jawab
Muslim ke liye Christmas celebrate karna kaisa hai  

आज के दौर में गैर-मुस्लिम त्योहार दुनिया भर में मार्केटिंग और ट्रेंड्स की वजह से आम हो चुके हैं।इस दौर में अलग–अलग धर्मों और संस्कृतियों के मेल-जोल के कारण यह सवाल अक्सर उठता है कि Christmas Wish Ya Celebrate karna kaisa hai? क्या मुसलमानों के लिए क्रिसमस मनाना या Merry Christmas कहना सही है? कई मुसलमान जानकारी के अभाव में या सामाजिक दबाव के चलते ऐसे त्योहारों में शामिल हो जाते हैं जिनकी नींव एक ऐसे अक़ीदें पर रखी गई है जो इस्लाम की तौहीद के बिल्कुल खिलाफ है।
इस्लाम में अल्लाह की वहदानियत (Oneness of Allah) की हिफाज़त सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। कुरान और हदीस साफ बताती हैं कि किसी ऐसे त्योहार की ताइद (समर्थन) करना जिसमें अल्लाह के लिए बेटा मानने जैसा गलत और गुमराह करने वाला aqeedah शामिल हो, बिल्कुल जायज़ नहीं।
इस लेख Christmas Wish Ya Celebrate karna kaisa hai? में हम क्रिसमस के हुक्म, कुरान और हदीस की दलीलों, और उलमा व फुकहा के स्पष्ट बयान को आसान भाषा में पेश करेंगे, ताकि हर मुसलमान सही और पक्की राह को पहचान सके।

इस्लामी नज़रिये से Christmas की हक़ीक़त

Christmas (25 December) ईसाइयों का धार्मिक त्योहार है, जो हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को “ईश्वर का बेटा” मानकर मनाया जाता है।
जबकि इस्लाम के अक़ीदे में:
हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम अल्लाह के रसूल हैं न वो ख़ुदा हैं, न ख़ुदा के बेटे

👉 इसलिए Christmas मनाना या इसकी मुबारकबाद देना, इस्लामी अक़ीदे और इस्लाम की बुनियादी शिक्षा तौहीद के खिलाफ है। यह मसअला सिर्फ़ “खुशी” का नहीं, बल्कि एक दूसरे मज़हब के अक़ीदे की ताईद का भी है।



📖गैर-इस्लामी अक़ीदे से मुतल्लिक़ अल्लाह का फरमान 

  1.  गैर-इस्लामी अक़ीदे से दूरी
    तुम उनके रास्ते पर न चलो…”📖 (सूरह अल-जासिया 45:18)
  2.  शिर्क से सख़्त मनाही
    “उन्होंने अल्लाह के सिवा अपने रहबरों और ईसा बिन मरयम को रब बना लिया।”📖 (सूरह अत-तौबा 9:31)
  3.  ईसा अलैहिस्सलाम के बारे में ग़लत अक़ीदा
    “काफ़िर हो गए वो लोग जो कहते हैं कि मसीह ही अल्लाह है।”📖 (सूरह अल-माइदा 5:72
    )
➡️ इन आयात से वाज़ेह है कि ऐसे त्योहारों की तसदीक़ या मुबारकबाद देना, जिनकी बुनियाद ग़लत अक़ीदे पर हो, जायज़ नहीं।
  1.  गैर-मुस्लिम मज़हबी रस्मों में शामिल होने की मनाही

    अल्लाह तआला फ़रमाता है:
    “रहमान के बंदे वो हैं जो ज़ूर (झूठ, कुफ़्र और बटील) की मजलिसों में शरीक नहीं होते।”
    (सूरह फ़ुरक़ान 25:72)
    उलमा के नज़दीक “ज़ूर” से मुराद गैर-मुस्लिम मज़हबी त्यौहारों में शामिल होना भी है।
  2.  उनकी मज़हबी ख़ासियत की ताईद करना मना है

    अल्लाह तआला फ़रमाता है:
    “गुनाह और ज़्यादती के कामों पर एक-दूसरे की मदद न करो।”(सूरह मायदा 5:2)
    Christmas मनाना या मनवाना — दोनों ईसाइयों के गलत अक़ीदे की ताईद में आता है।
  3.  ईसा अलैहिस्सलाम के बारे में इस्लाम का असल अक़ीदा

     “मसीह (ईसा) मरयम के बेटे सिर्फ़ एक रसूल हैं।”(सूरह मायदा 5:75)
➡ 
इसलिए उनका जन्म-दिन मनाना, खासकर वह जिसमें उन्हें खुदा का बेटा कहा जाए — मुसलमान के लिए जायज़ नहीं।


25th december ko Rabb e kaayenat ki shaan mein azeem gustaakhi ki jati hai… Christmas manane walon aur mubarakbad dene walon goya tasleem kar rahe hain ke Allah swt ki bhi biwi aur beta hai (Nawzubillah).”



📜 रसूलुल्लाह ﷺ का फरमान:

1️⃣ “जिस कौम की मुशाबहत करे…”

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
जो जिस कौम की मुशाबहत (नकल) करेगा, वह उन्हीं में से होगा।
(अबू दाऊद 4031)

Christmas के पेड़, टोपी, लाइट्स, गिफ्ट्स — यह सब मुसाबहत (नकल) में आता है।

2️⃣ रसूल ﷺ ने सिर्फ़ दो ईदें क़ायम की हैं

अल्लाह ने तुम्हें इन दोनों (जाहिलियत के त्योहारों) के बदले दो बेहतर दिन दिए हैं: ईदुल फ़ित्र और ईदुल अज़्हा।”(अबू दाऊद 1134)

मुसलमानों की ईदें मुकम्मल हैं; इनके अलावा नई ईदें इजाद करना या दूसरों की ईदें मनाना शरीअत में नहीं।

Christmas wish करना (Merry Christmas कहना) — मुसलमानों के लिए कैसा?

क्रिसमस मनाना या “Merry Christmas” कहना, इस्लामिक दृष्टि से सही नहीं है। क्योंकि यह ऐसे aqeedah की ताईद (समर्थन) है जो तौहीद के खिलाफ जाता है और अल्लाह की शान में बड़ी गुस्ताख़ी को शामिल करता है।

♦️Merry Christmas क्यों नहीं कहना चाहिए?

"Merry Christmas" जैसे शब्दों से बचना चाहिए, और खास तौर पर इसको wish करने से रोकना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा मतलब उस गलत aqeedah को मानना है कि — "अल्लाह ने बेटा जन्म दिया" (नऊज़ुबिल्लाह)। यह बात इस्लाम में खुला कुफ़्र और शरीक (शिर्क) है।

♦️ईसाइयों का गलत aqeedah क्या है?

ईसाइयों का यह aqeedah है कि ईसा अलैहिस्सलाम — नऊज़ुबिल्लाह — अल्लाह तआला के बेटे हैं।
वे जिस दिन क्रिसमस मनाते हैं, उनके अनुसार यह वह दिन है जब “अल्लाह ने बेटा पैदा किया था” (नऊज़ुबिल्लाह)। यह aqeedah इस्लाम में पूरी तरह से रद्द और बुनियादी तौर पर गलत है।


♦️मुसलमान की ओर से क्रिसमस की बधाई देना क्या दर्शाता है?

जब कोई मुसलमान क्रिसमस की बधाई देता है या दूसरों की खुशी में शामिल होता है, तो इसका मतलब यह निकलता है कि वह इस गलत aqeedah से सहमत है —
कि अल्लाह ने बेटा पैदा किया और ईसा अलैहिस्सलाम अल्लाह के बेटे हैं (नऊज़ुबिल्लाह)।
इसलिए यह काम ईमान के लिए बेहद नुकसानदेह और बिल्कुल नाजायज़ है।

♦️25 दिसंबर को उनकी खुशी में शामिल होना क्यों गलत है?

जो लोग 25 दिसंबर को काफ़िरों के साथ देते हैं, उन्हें बधाई देते हैं या उनकी खुशियों में रंग भरते हैं—
उन्हें चाहिए कि एक बार अपने रब की आयात पढ़ें। अगर पढ़कर भी समझ न आए तो अल्लाह से हिदायत की भीख मांगें।


सूरह इख़्लास का साफ़ और अंतिम ऐलान

सूरह इख़्लास में अल्लाह तआला ने तौहीद को बिल्कुल साफ़ कर दिया:

  1. कह दीजिए: वह अल्लाह एक ही है।
  2. अल्लाह बे-नियाज़ है।
  3. न वह पैदा हुआ, न उसने किसी को पैदा किया।
  4. और न कोई उसका हमसर है।

अगर हम इस सूरह को पढ़कर भी बात न समझें तो सच में हिदायत सिर्फ़ अल्लाह के पास है। यह सुरह साफ़ तौर पर साबित करती है कि अल्लाह के लिए बेटा मानना सबसे बड़ा झूठ और गुमराही है।

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हिदायत अल्लाह के हाथ में है

अगर इस किताब (कुरान) को पढ़कर भी किसी को समझ नहीं आती, तो वह कभी सही राह पर नहीं आ सकता। इंसान सिर्फ समझा सकता है, लेकिन हिदायत देना सिर्फ अल्लाह का काम है।

कुरान में अल्लाह ने साफ़ कहा:
"आप कह दीजिए, आप सिर्फ समझाने वाले हैं, हिदायत देने वाला मैं हूँ—जिसे चाहूँ हिदायत दूँ और जिसे चाहूँ गुमराह कर दूँ।"


25 दिसंबर—अल्लाह की शान में बड़ी गुस्ताख़ी

25 दिसंबर को ऐसा aqeedah मनाया जाता है जिसमें रब-ए-कायनात की शान में बहुत बड़ी गुस्ताख़ी की जाती है।
क्रिसमस मनाने वाले, और उसे बधाई देने वाले—मानो यह स्वीकार कर रहे हैं कि अल्लाह की बीवी और बेटा है (नऊज़ुबिल्लाह)।
यह बात इतनी बड़ी है कि—


इस अकीदः और गुस्ताख़ी से मुतल्लिक़ क़ुरआन में अल्लाह का ग़ज़ब भरा फ़रमान

25 Dec को कुफ़्फ़ार का साथ देने वालों...ज़रा एक दफा अपने रब की आयात को तो पढ़ लो!
अल्लाह तआला सूरह मरयम में फरमाता है:
  1. 💠وَقَالُوا اتَّخَذَ الرَّحْمٰنُ وَلَدًا
    “उन्होंने कहा कि रहमान ने औलाद बनाई।”
  2. 💠لَقَدْ جِئْتُمْ شَيْئًا إِدًّا
    “तुमने बहुत बुरी और भयानक बात कही है।”
  3. 💠تَكَادُ السَّمَاوَاتُ يَتَفَطَّرْنَ مِنْهُ وَتَنْشَقُّ الْأَرْضُ وَتَخِرُّ الْجِبَالُ هَدًّا
    “करीब है कि आसमान फट पड़ें,ज़मीन टुकड़े हो जाए,और पहाड़ ढहकर गिर पड़ें…”
  4. 💠أَنْ دَعَوْا لِلرَّحْمٰنِ وَلَدًا
    “क्योंकि उन्होंने रहमान के लिए औलाद ठहराई।”
  5. 💠وَمَا يَنْبَغِي لِلرَّحْمٰنِ أَنْ يَتَّخِذَ وَلَدًا
    “रहमान की शान के लायक नहीं कि वह औलाद रखे।”
  6. 💠إِنْ كُلُّ مَنْ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ إِلَّا آتِي الرَّحْمٰنِ عَبْدًا
    “आसमान और ज़मीन में जो भी है,
    सब अल्लाह के बन्दे बनकर ही उसके सामने हाज़िर होंगे।”




📚 उलमा व फुकहा के अक़वाल

1️⃣ इब्ने तैमिया रहिमहुल्लाह

  • गैर-मुस्लिमों के त्योहारों में शरीक होना, उनकी ताईद करना और उनकी नकल करना हराम है।”(इक़्तिदा अस सिरात अल मुस्तक़ीम)

2️⃣ इब्नुल क़य्यिम रहिमहुल्लाह

  • उनकी ईदों को मानना, उनमें शामिल होना, या उन्हें बधाई देना — सब नाजायज़ है।”
    (अहकाम अहल जिम्मा)

3️⃣ इमाम नववी रहिमहुल्लाह :

  • “काफ़िरों के धार्मिक शिआर में शरीक होना या उनकी मुबारकबाद देना जायज़ नहीं।”

4️⃣ जमहूर फुकहा (हंबली, मालिकी, शाफेई, हनफी)

  • सभी के नज़दीक Christmas पर “Merry Christmas” कहना, केक काटना या सेलिब्रेशन में शामिल होना —
    मक़रूह तहरीमी / हराम है क्योंकि यह उनके गलत अक़ीदे की ताईद है।

🎁 क्या सिर्फ़ “गिफ्ट” देना या लेना जायज़ है?

अगर गिफ्ट मज़हबी ताईद के तौर पर हो → हराम
अगर सिर्फ़ इंसानी सदभावना (Non-religious) हो → कुछ उलमा के बीच इख़्तिलाफ़ है,
लेकिन हुक्म यही कि Christmas से जुड़ी निशानियों से बचना बेहतर और सुरक्षित है।

Social Pressure की वजह से क्या करना चाहिए?

अगर ऑफिस, स्कूल, या सोसायटी में जबरदस्ती माहौल हो, तो मुसलमान:

  • शीरिन लहजे में “We don't celebrate religious holidays, but thank you” कह सकता है।
  • तटस्थ रहें, लेकिन सेलिब्रेशन में शामिल न हों।
  • किसी को ठेस पहुंचाए बिना अपना मज़हबी मौक़िफ़ वाजेह रखें।

Final Verdict — इस्लामी फ़ैसला

🔴 Christmas मनाना, कार्ड देना, गाना, केक, सजावट — सब नाजायज़ है।
🔴 Merry Christmas कहना भी गैर-मुस्लिम अक़ीदे की ताईद है — इसलिए बचना जरूरी है।
🟢 आम इंसानी रिश्तों में सद्भावना व अच्छा अख़लाक दिखाना जायज़ है, लेकिन मज़हबी रस्मों में शरीक होना मना है।


 🌟 नतीजा

अब आप समझ गए होंगे कि Christmas wish Ya Celebrate karna kaisa hai? और आख़िर में यही सच्चाई सामने आती है कि क्रिसमस मनाना, उसकी बधाई देना या Merry Christmas कहना मुसलमानों के लिए जायज़ नहीं है, क्योंकि यह त्योहार एक ऐसे aqeedah पर आधारित है जिसमें “अल्लाह ने बेटा जनम दिया”—जैसी बड़ी और खुली गुस्ताख़ी शामिल है।
कुरान ने बार-बार यह बात स्पष्ट कर दी है कि अल्लाह बे-नियाज़ है, न वह किसी से पैदा हुआ और न किसी को पैदा किया, और ऐसे aqeedah को स्वीकार करना ईमान के ख़िलाफ़ है। उलमा और फुकहा भी इस पर मुत्तफ़िक़ हैं कि गैर-मुस्लिमों के धार्मिक त्योहारों में भाग लेना या उन्हें बधाई देना उनके aqeedah की ताइद करने जैसा है—जो एक मुसलमान के लिए बेहद नुकसानदेह है।
इसलिए हर मुसलमान का फर्ज़ है कि वह अपने ईमान की हिफाज़त करे, तौहीद को सबसे ऊपर रखे, और अच्छे अख़लाक के साथ रहते हुए भी ऐसे धार्मिक त्योहारों से पूरी तरह दूरी बनाए।
हिदायत अल्लाह के हाथ में है—हमें चाहिए कि हम हमेशा अल्लाह से सच्ची हिदायत, सही समझ और पुख़्ता ईमान की दुआ करते रहें।

❗ Christmas मनाना,
❗ Merry Christmas कहना,
❗ मुबारकबाद देना,
❗ खशियाँ शेयर करना —

सब एक ऐसे अक़ीदे की ताईद है जो सीधा-सीधा तौहीद के खिलाफ़ और अल्लाह की शान में गुस्सताख़ी है। इसलिए एक मुसलमान के लिए Christmas के हर मज़हबी तत्व से दूर रहना ज़रूरी है।

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Author
इस्लामी ब्लॉगर — सही दीन और इल्म को आम करने की कोशिश। खूबसूरत नसीहत:  इस्लाम हमें अपनी पहचान, अपने अक़ीदे, और अपनी ईदों की हिफाज़त का हुक्म देता है। दूसरों के मज़हब का एहतराम ज़रूरी है, लेकिन उनकी मज़हबी रस्मों में शरीक होना — तौहीद की रूह के खिलाफ है।

इस्लाम हमें सिखाता है: पड़ोसियों से अच्छा सुलूक, इंसाफ़, नरमी और इंसानियत, लेकिन अक़ीदे में समझौता किए बिना। आप यह कह सकते हैं:“I respect you”,“Have a good day”,“Best wishes”लेकिन “Merry Christmas” “Enjoy Christmas” नहीं।

 FAQs 

1️⃣ क्या मुसलमान Christmas सेलिब्रेट कर सकते हैं?

नहीं। Christmas एक ईसाई मज़हबी त्योहार है जो इस्लाम के तौहीदी अक़ीदे के खिलाफ़ है। इसलिए इसका सेलिब्रेशन करना मुसलमानों के लिए जायज़ नहीं।

2️⃣ क्या “Merry Christmas” कहने की अनुमति है?

उलमा की आम राय है कि "Merry Christmas" कहना ईसाइयों के गलत अक़ीदे (Jesus को God का बेटा मानना) की ताईद है, जो नाजायज़ है।

3️⃣ ऑफिस या स्कूल में Christmas पार्टी में जाना कैसा है?

मज़हबी रस्मों वाली पार्टी में जाना मना है।
अगर माहौल पूरी तरह मज़हबी हो — तो जाना जायज़ नहीं।
शालीनता से मना करना बेहतर है।

4️⃣ क्या Christmas के दिन गिफ्ट देना या लेना ठीक है?

अगर गिफ्ट Christmas के धार्मिक त्योहार का हिस्सा बनकर दिया जाए, तो यह जायज़ नहीं।
नॉर्मल दिनों जैसा गिफ्ट — अलग मामला है, लेकिन Christmas-लिंक्ड गिफ्ट से बचना बेहतर है।

5️⃣ क्या non-Muslims का एहतराम करते हुए सिर्फ सोशल लेवल पर शुभकामना दी जा सकती है?

इंसानी सद्भाव बनाए रखना ठीक है, लेकिन ऐसा कोई शब्द न बोला जाए जिससे उनके धार्मिक त्योहार की ताईद होती हो।

6️⃣ क्या कुरान और हदीस में गैर-मुस्लिम त्योहारों में शामिल होने की मनाही है?

हाँ। कई आयात और हदीसें गैर-मुस्लिम मज़हबी रस्मों की ताईद से रोकती हैं —
जैसे “Man tashabbaha bi qawmin fa huwa minhum”, और “La yash-hadoona az-zoor”.

7️⃣ मुसलमानों के लिए कौन-कौन सी ईदें मुकर्रर हैं?

इस्लाम में सिर्फ़ दो ईदें हैं:
ईद-उल-फितर और ईद-उल-अज़हा।
इनके अलावा कोई नई ईद या त्योहार बनाना सही नहीं।


Christmas manana ya mubarakbad dena shirk hai. Merry Christmas in kalmaat se bachein khas kar is ko wish karne se rokain is ka matlab hai ka Allah swt ne beta jana (Nawzubillah).” “Esaiyon ka aqeedah yeh hai ka Eesa Alaihi salam nawz billah Allah taala ke betay hain… to jab hum kisi ko is tehwar ki mubarakbaad dete hain… to is ka matlab yeh huwa ke hum is cheez par agree ho jatay hain (Nawzubillah).”

 کرسمس (Christmas) منانا مسلمانوں کے لیے کیسا ہے؟ — قرآن و سنت کی روشنی میں

اسلام میں عقائد کی حفاظت سب سے اہم فریضہ ہے۔ کسی بھی ایسے عقیدے یا تہوار میں شامل ہونا جس میں شرک، اللہ کی ذات کی توہین یا باطل عقیدہ شامل ہو، مسلمانوں کے لیے سخت منع کیا گیا ہے۔ اسی اصول کے تحت اسلامی شریعت اور جمہور علما نے کرسمس منانے یا کسی کو Merry Christmas کہنے کو صاف طور پر منع فرمایا ہے۔
Muslim Christmas celebrate karen ya nahi Islamic view on Christmas Roman Hindi
Quran aur Hadees ki roshni me Christmas ka Islami hukum  

آج کے دور میں دنیا کے مختلف مذاہب اور تہذیبوں کے میل ملاپ کے باعث مسلمانوں کے درمیان یہ سوال عام ہو چکا ہے کہ Christmas Wish Ya Celebrate karna kaisa hai اور  کیا کرسمس منانا یا Merry Christmas کہنا جائز ہے؟ بہت سے مسلمان لاعلمی یا معاشرتی دباؤ کی وجہ سے ایسے تہواروں میں شامل ہو جاتے ہیں، جن کی بنیاد عقیدۂ شرک اور اللہ تعالیٰ کی شان میں کھلی توہین پر قائم ہے۔ اسلام میں توحید کی حفاظت انسان کی سب سے بڑی ذمہ داری ہے، اور قرآن و حدیث واضح طور پر بتاتے ہیں کہ کسی ایسی رسم یا تہوار کی تائید کرنا جس کا تعلق باطل عقیدے سے ہو، ایمان کے منافی ہے۔ اس آرٹیکل Christmas Wish Ya Celebrate karna kaisa hai میں ہم کرسمس کے اسلامی حکم، قرآن و سنت کی دلیلوں، اور علما و فقہا کی آراء کو جامع اور آسان انداز میں پیش کریں گے، تاکہ ایک مسلمان صحیح رہنمائی حاصل کر سکے۔


 کرسمس کیا ہے؟

کرسمس عیسائیوں کا مذہبی جشن ہے جس میں وہ حضرت عیسیٰ علیہ السلام کو “خدا کا بیٹا” مانتے ہوئے ان کی پیدائش کا دن مناتے ہیں۔
یہ عقیدہ اسلام کے بنیادی اصول توحید کے سراسر خلاف ہے۔
لہٰذا یہ مسئلہ صرف خوشی کا نہیں، بلکہ دوسرے مذہب کے غلط عقیدے کی تائید کا ہے۔

👈 مسلمان کرسمس کیوں نہیں منا سکتے؟

علما کے مطابق:

  • یہ عقیدہ شرک پر مبنی ہے
  • اللہ کی ذات کی توہین ہے
  • تیسری امت یعنی عیسائیوں کی مذہبی رسومات میں شامل ہونا منع ہے
  • "Merry Christmas" کہنا ایسا ہے جیسے اُن کے عقیدے کی تصدیق کرنا

“25th december ko Rab kaynat ki shaan mein azeem gustaakhi ki jati hai… Christmas manane walon aur mubarakbad dene walon goya tasleem kar rahe hain ke Allah swt ki bhi biwi aur beta hai (Nawzubillah).”

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قرآنِ مجید میں اس عقیدے سے متعلق فرمان

1. حضرت عیسیٰؑ کے بارے میں اسلامی عقیدہ

﴿مَا الْمَسِيحُ ابْنُ مَرْيَمَ إِلَّا رَسُولٌ﴾ (المائدہ: 75)
مسیح ابن مریم تو صرف ایک رسول ہیں۔

2. اللہ تعالیٰ کا بیٹا قرار دینے کی سخت تردید

﴿لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ﴾ (سورۃ الاخلاص: 3)
نہ وہ کسی کا باپ ہے اور نہ اس کی کوئی اولاد ہے۔

3. کفر کے شعائر سے براءت

﴿وَالَّذِينَ لَا يَشْهَدُونَ الزُّورَ﴾ (الفرقان: 72)
حضرت ابن عباسؓ فرماتے ہیں:
"الزور سے مراد مشرکین کے تہوار ہیں"

احادیثِ نبوی ﷺ کی روشنی میں

1. غیر مسلم اقوام کی مشابہت سے ممانعت

نبی ﷺ نے فرمایا:
"مَنْ تَشَبَّهَ بِقَوْمٍ فَهُوَ مِنْهُمْ" (سنن ابی داؤد: 4031)
جو جس قوم کی مشابہت اختیار کرے وہ انہی میں سے ہے۔

2. اسلامی تہواروں کی تخصیص

جب مدینہ میں لوگ دو تہوار مناتے تھے تو نبی ﷺ نے فرمایا:

"إِنَّ اللَّهَ قَدْ أَبْدَلَكُمْ بِهِمَا خَيْرًا مِنْهُمَا"(سنن ابی داؤد: 1134)
اللہ نے تمہیں ان سے بہتر دو تہوار عطا فرمائے ہیں — عیدالفطر اور عیدالاضحی۔

🔸 کرسمس منانا یا اس کی مبارکباد دینا کیسا عمل ہے؟

کرسمس منانا یا “Merry Christmas” کہنا اسلامی نقطۂ نظر سے درست نہیں، کیونکہ یہ ایسے باطل عقیدے کی تائید ہے جو توحید کے بلکل خلاف ہے اور اللہ کی شان میں کھلی گستاخی پر مبنی ہے۔


🔸 Merry Christmas کیوں نہیں کہا جا سکتا؟

"Merry Christmas" جیسے الفاظ سے بچنا ضروری ہے، خاص طور پر اس کو wish کرنے سے روکنا چاہیے۔
کیونکہ اس کا سیدھا مطلب اس غلط عقیدے کو ماننا ہے کہ "اللہ نے بیٹا جنا" (نَعُوذُ بِاللّٰہِ)۔
یہ عقیدہ اسلام میں کھلا شرک اور کفر ہے۔


🔸 عیسائیوں کا گمراہ کن عقیدہ کیا ہے؟

عیسائیوں کا عقیدہ ہے کہ عیسیٰ علیہ السلام — نَعُوذُ بِاللّٰہ — اللہ تعالیٰ کے بیٹے ہیں۔
وہ جس دن کرسمس مناتے ہیں، ان کے مطابق یہ وہ دن ہے جب "اللہ نے بیٹا پیدا کیا" (نَعُوذُ بِاللّٰہ)۔
یہ عقیدہ اسلام میں سراسر باطل اور اللہ کی وحدانیت کے منافی ہے۔


🔸 مسلمانوں کی طرف سے کرسمس کی مبارکباد دینے کا کیا مفہوم بنتا ہے؟

جب کوئی مسلمان کرسمس کی مبارکباد دیتا ہے یا ان کی خوشیوں میں شامل ہوتا ہے، تو اس کا مطلب یہ نکلتا ہے کہ وہ اس باطل عقیدے کی تائید کر رہا ہے کہ:
اللہ نے بیٹا جنا اور عیسیٰ علیہ السلام اللہ کے بیٹے ہیں (نَعُوذُ بِاللّٰہ)۔
اس طرح کا عمل ایمان کے لیے سخت نقصان دہ ہے۔


🔸 25 دسمبر کو ان کی خوشی میں شامل ہونا کیوں غلط ہے؟

جو لوگ 25 دسمبر کو کفّار کا ساتھ دیتے ہیں، انہیں مبارکباد دیتے ہیں یا ان کی خوشیوں میں شامل ہوتے ہیں—
انہیں چاہیے کہ ایک بار اللہ کی آیات پڑھیں۔
اگر پڑھ کر بھی نہ سمجھیں تو اللہ سے ہدایت کی دعا مانگیں۔


🔸 سورہ اخلاص کی روشنی میں واضح فیصلہ

سورہ اخلاص میں اللہ تعالیٰ صاف فرماتا ہے:
"کہہ دیجیے، اللہ ایک ہے۔"
"اللہ بے نیاز ہے۔"
"نہ وہ کسی سے پیدا ہوا اور نہ کسی نے اسے جنا۔"
"اور نہ کوئی اس کا ہمسر ہے۔"

یہ آیات صاف اعلان کرتی ہیں کہ اللہ کے لیے بیٹا ماننا سب سے بڑا جھوٹ ہے۔


🔸 ہدایت صرف اللہ کے ہاتھ میں ہے

اگر اس کتابِ الٰہی (قرآن) کو پڑھ کر بھی کسی کو سمجھ نہیں آتی، تو وہ کبھی سیدھی راہ پر نہیں آسکتا۔
انسان صرف سمجھا سکتا ہے، لیکن ہدایت دینا صرف اللہ کا اختیار ہے۔

قرآن میں اللہ نے فرمایا:
"آپ کہہ دیجیے، آپ صرف سمجھانے والے ہیں، ہدایت دینے والا میں ہوں—جسے چاہوں ہدایت دوں اور جسے چاہوں گمراہ کر دوں۔"


🔸 25 دسمبر — اللہ کی شان میں بڑی گستاخی کا دن

25 دسمبر کو ایسا عقیدہ منایا جاتا ہے جس میں ربِ کائنات کی شان میں انتہائی بڑی گستاخی شامل ہے۔
کرسمس منانے والے یا اسے مبارک باد دینے والے گویا یہ مان رہے ہوتے ہیں کہ اللہ کی بھی بیوی اور بیٹا ہے (نَعُوذُ بِاللّٰہ)۔

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🔸 قرآنِ مجید میں اللہ تعالیٰ کا غضب بھرا فرمان

25 دسمبر کو کفار کا ساتھ دینے والوں.... ذرا ایک دفعہ اپنے ربّ کی آیات کو تو پڑھو
پھر اللہ تعالیٰ سورہ مریم میں فرماتا ہے:
“وَقَالُوا اتَّخَذَ الرَّحْمٰنُ وَلَدًا… تَکَادُ السَّمٰوَاتُ یَتَفَطَّرْنَ مِنْهُ…”

یعنی:
“انہوں نے کہا کہ رحمان نے بیٹا بنا لیا۔ تم بہت ہی بری بات لائے ہو، قریب ہے کہ آسمان پھٹ جائیں، زمین شق ہو جائے اور پہاڑ ریزہ ریزہ ہو جائیں اس بات پر کہ وہ اللہ کے لیے اولاد ثابت کرتے ہیں۔”
(سورہ مریم 88–93)

یہ آیات ثابت کرتی ہیں کہ اللہ کے لیے بیٹا ماننے کا عقیدہ اللہ کے نزدیک بدترین گستاخی ہے۔

(سورہ مریم: 88–93)


علما و فقہا کے اقوال

 شیخ الاسلام ابنِ تیمیہ رحمہ اللہ

  • غیر مسلموں کے تہواروں میں شریک ہونا، ان کی تائید کرنا اور ان کی مشابہت اختیار کرنا حرام ہے۔”(اقتضاء الصراط المستقیم)
علامہ ابن القیم رحمہ اللہ
  • ان کی عیدوں کو تسلیم کرنا، انہیں مبارک دینا، ان میں شرکت کرنا — سب ناجائز ہے۔”(أحکام أهل الذمۃ)

امام نوویؒ

  • کفار کی مشابہت اختیار کرنا ممنوع ہے، خصوصاً ان کے مذہبی شعار میں۔"

دارالافتاء (جمہور اہلِ علم)

  • کرسمس کی مبارکباد دینا، اس میں شرکت کرنا یا اس دن خوشی منانا شرعاً ناجائز ہے کیونکہ یہ کفریہ عقائد کی تائید ہے۔

چاروں مذاہبِ فقہ (حنفی، مالکی، شافعی، حنبلی)تمام فقہا کے نزدیک:

  • ♦️Merry Christmas کہنا
    ♦️کرسمس پارٹی میں شریک ہونا
    ♦️کیک کاٹنا یا لائٹس لگانا
    👈 سب مکروہِ تحریمی یا حرام ہے، کیونکہ یہ دوسرے دین کی مذہبی شعار کی تائید ہے۔ 
    ۔

🎁 کیا صرف ’گفٹ‘ دینا یا لینا جائز ہے؟

🔘 اگر گفٹ مذہبی تہوار کی مناسبت سے ہو → حرام
🔘 اگر نارمل تحفہ ہو، مذہبی پہلو شامل نہ ہو → اختلاف ہے


لیکن علما کی عمومی رائے:
کرسمس کے دن اور اس کے رموز سے دور رہنا ہی بہتر اور محفوظ ہے۔
۔


معاشرتی دباؤ (Social Pressure) کی صورت میں کیا کریں؟

اگر آفس، اسکول، یا سوسائٹی میں ماحول ایسا ہو:
نرمی سے کہہ دیں:
🛑 ہم مذہبی تہوار نہیں مناتے، شکریہ”
🛑 احترام کے ساتھ اپنا اسلامی موقف واضح کریں
🛑 مگر جشن، پارٹی، یا مذہبی شعار میں شریک نہ ہوں
۔


 اسلامی حکم (Final Verdict)

🔴 کرسمس منانا، اس میں شریک ہونا، سانتا، لائٹس، کیک، پارٹی — سب ناجائز / حرام ہے۔
🔴 Merry Christmas کہنا بھی کرسمس کے مذہبی پہلو کی تائید ہے — اس سے بچنا ضروری ہے۔
🟢 اچھے اخلاق، حسنِ سلوک اور انسانی ہمدردی عام معاملات میں جائز ہے، لیکن مذہبی رسومات میں شرکت جائز نہیں۔

🌟 ایک نصیحت

اسلام ہمیں اپنی پہچان، اپنے عقیدے اور اپنی عیدوں کی حفاظت کا حکم دیتا ہے۔
دوسرے مذاہب کا احترام اپنی جگہ، لیکن ان کے مذہبی شعار میں شرکت کرنا —
توحید کے منافی ہے
۔۔


خلاصہ

اسلام نے مسلمانوں کو صاف اور واضح عقیدہ دیا ہے:
"اللہ ایک ہے، بے نیاز ہے، نہ اس سے کوئی پیدا ہوا اور نہ وہ کسی سے پیدا ہوا"۔
ایسے باطل عقیدے کی خوشی میں شریک ہونا یا اس کی مبارکباد دینا ایمان کے خلاف ہے۔
مسلمانوں کے لیے ضروری ہے کہ:اپنے عقیدے کی حفاظت کریں
ایسے شرکیہ تہواروں سے دور رہیں
دوسروں کے مذاہب کی عزت کریں، مگر ان کی مذہبی رسومات میں شریک نہ ہوں

کرسمس منانا یا اس کی مبارکباد دینا—اسلام میں جائز نہیں، کیونکہ یہ اللہ کی وحدانیت کے خلاف ایک باطل عقیدے کی تائید ہے۔
ہر مسلمان پر لازم ہے کہ وہ اپنے ایمان کی حفاظت کرے، توحید پر قائم رہے، اور کسی بھی ایسے مذہبی تہوار کا حصہ نہ بنے جس میں اللہ کی شان میں گستاخی پائی جاتی ہو۔

FAQs

1️⃣ کیا مسلمان کرسمس منانے کی اجازت رکھتے ہیں؟

نہیں۔ کرسمس ایک خالص عیسائی مذہبی تہوار ہے جو اسلامی عقیدۂ توحید کے خلاف ہے، اس لیے اسے منانا جائز نہیں۔

2️⃣ کیا “Merry Christmas” کہنا درست ہے؟

اکثر علما کے نزدیک یہ لفظ کہنا عیسائی عقیدہ (عیسیٰ کو خدا کا بیٹا ماننا) کی تائید میں شمار ہوتا ہے، لہٰذا ناجائز ہے۔

3️⃣ آفیس یا اسکول کی Christmas پارٹی میں جانا کیسا ہے؟

اگر اس میں مذہبی رنگ ہو، نعرے ہوں، گانے ہوں یا مذہبی شعار ہوں —
تو اس میں شرکت کرنا جائز نہیں۔
نرمی سے معذرت کرنا بہتر ہے۔

4️⃣ کیا Christmas کے دن تحفہ دینا یا لینا جائز ہے؟

اگر تحفہ مذہبی تہوار کی مناسبت سے ہو تو ناجائز ہے۔
عام دنوں کی طرح نارمل گفٹ الگ معاملہ ہے، مگر کرسمس کا حصہ بننے سے بچنا بہتر ہے۔

5️⃣ کیا غیر مسلموں کا احترام کرتے ہوئے کوئی نیوٹرل جملہ کہا جا سکتا ہے؟

جی ہاں، احترام اپنی جگہ ہے، مگر ایسا جملہ نہ کہیں جس میں ان کے مذہبی عقیدے کی تائید شامل ہو۔

6️⃣ کیا قرآن و حدیث میں غیر مسلم تہواروں سے دور رہنے کا حکم ہے؟

جی ہاں۔ متعدد آیات اور احادیث اس بات سے روکتی ہیں کہ مسلمان غیر مسلم مذہبی رسومات میں شامل ہوں —
جیسے “من تشبہ بقوم فھو منھم” اور “لا يشهدون الزور”۔

7️⃣ اسلام نے مسلمانوں کیلئے کتنی عیدیں مقرر کی ہیں؟

اسلام میں صرف دو عیدیں مقرر ہیں:
عید الفطر اور عید الاضحی۔
ان کے علاوہ کوئی تیسری مذہبی عید نہیں۔


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