आजकल बहुत से घरों में एक अहम सवाल उठता है कि क्या Kya Biwi Par Saas Sasur ki khidmat Waajib Hai? क्या बीवी पर अपने सास-ससुर की खिदमत करना शरीअत की नज़र में ज़रूरी है? अक्सर शादी के बाद बीवी से उम्मीद की जाती है कि वह न सिर्फ अपने शौहर की बल्कि उसके माँ-बाप की भी खिदमत करे। लेकिन असल सवाल यह है कि इस्लाम ने बीवी पर क्या जिम्मेदारियां डाली हैं और उलमा-ए-किराम की राय इस बाब में क्या है? इस आर्टिकल Kya Biwi Par Saas Sasur ki khidmat Waajib Hai?में हम इस मसले को कुरआन, हदीस और फुक़हा के अक़वाल की रोशनी में समझेंगे।
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| Biwi par Saas Sasur ki khidmat |
✦ 1. बीवी की अस्ल जिम्मेदारी
وَلَهُنَّ مِثْلُ الَّذِي عَلَيْهِنَّ بِالْمَعْرُوفِ ۚ وَلِلرِّجَالِ عَلَيْهِنَّ دَرَجَةٌ
(सूरह अल-बक़रह: 228)
यानी औरतों पर वैसे ही हक़ हैं जैसे उनके हक़ मर्दों पर हैं। मगर मर्दों को एक दर्जा (क़ुव्वत व ज़िम्मेदारी) हासिल है।
इस आयत से साफ़ होता है कि बीवी की जिम्मेदारी सबसे पहले उसके शौहर की तरफ है, न कि उसके वालिदैन की तरफ।
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✦ 2. सास-ससुर की खिदमत का हुक्म
शरीअत के मुताबिक:
- बीवी पर अपने सास-ससुर की खिदमत करना शरीअत के लिहाज़ से लाज़िम (फ़र्ज़ या वाजिब) नहीं है।
- हाँ, अगर वह मोहब्बत, अख़लाक़ और ख़ैरख़्वाही की बुनियाद पर घर के सुकून की नीयत से उनकी खिदमत करती है, तो यह बड़ा सवाब और नेकी का काम है।
✦ 3. उलमा-ए-किराम के अक़वाल
इमाम इब्ने अबिद्दीन शामी (रह.)
औरत पर शौहर के वालिदैन की खिदमत लाज़िम नहीं है। हाँ अगर वह करे तो यह उसकी अच्छाई और नेकी है।”
शैख इब्ने उसैमीन (रह.):
सास-ससुर की खिदमत बीवी पर वाजिब नहीं। लेकिन अगर वह हुस्ने-सुलूक और शौहर को राज़ी करने के लिए करे तो यह बेहतरीन अमल है।”
दारुल इफ्ता अल-अज़हर (मिस्र) और दारुल उलूम देवबंद:
सास-ससुर की खिदमत बीवी पर शरीअत के लिहाज़ से फ़र्ज़ नहीं, बल्कि यह शौहर की जिम्मेदारी है कि वह अपने वालिदैन की खिदमत करे। बीवी अगर तआवुन करे तो यह उसके लिए सवाब का काम है।”
✦ 4. शौहर की जिम्मेदारी
कुरआन में अल्लाह फरमाता है:> وَقَضَىٰ رَبُّكَ أَلَّا تَعْبُدُوا إِلَّا إِيَّاهُ وَبِالْوَالِدَيْنِ إِحْسَانًا(सूरह बनी इस्राईल: 23)यानी अल्लाह तआला ने औलाद को अपने वालिदैन के साथ अच्छा बर्ताव करने का हुक्म दिया है।
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✦ 5. अखलाक़ी पहलू
- शरीअत के लिहाज़ से खिदमत लाज़िम नहीं है।
- मगर अगर बीवी मोहब्बत, रहम-दिली और नेक नीयत से खिदमत करती है, तो इससे घर का माहौल पुरसुकून बनता है और अल्लाह के यहाँ अज्र मिलता है।यह उसकी नेकी और अखलाक़ी बुज़ुर्गी की अलामत है।
- शौहर को चाहिए कि वह बीवी से जबरदस्ती खिदमत न कराए।
- बीवी को चाहिए कि हद दरजे तक तआवुन करे, और शौहर को चाहिए कि जबरदस्ती उस पर खिदमत लादे नहीं।
✦ 6. एक सोचने वाली बात
लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर बेटा हर वक्त मां-बाप की खिदमत में ही लगा रहेगा, अगर मां बाप कमज़ोर हैं,बीमार है तो:
- वह रोज़ी-रोटी का इंतज़ाम कैसे करेगा? घर से बाहर कैसे निकले गा।
- अपने बीवी-बच्चों का खर्च कैसे उठाएगा?
- घर के बाकी कामकाज और जिम्मेदारियां कौन निभाएगा?
बेशक शरीअत ने बीवी को सास-ससुर की खिदमत के लिए लाज़िम और मजबूर नहीं किया, बल्कि यह काम बेटे की जिम्मेदारी रखा है। तो बीवी को भी चाहिए की अपने शौहर की इन जिम्मेदारियों को वो उठा ले ताकि शौहर बेफिक्र हो कर रोज़ी रोटी का इंतजाम करे , नहीं तो वो घर का खर्च कैसे चलाएगा और अगर बीवी मोहब्बत और अख़लाक़ की बुनियाद पर मदद करती है, तो यह उसकी तरफ से एक बेहतरीन नेकी और सवाब का काम और घर में सकून का जरिया होगा और शौहर की भी मदद हो जाएगी।
इस तरह बहू पर कोई शरीयतन बोझ भी नहीं पड़ता और बेटा भी अपनी असली जिम्मेदारियां (कमाई और घर चलाना) बेहतर अदा कर सकता है।जब शौहर कमाएगा ही नही तो खुद बीवी और बच्चों के अखराजात कैसे पूरे होंगे।
🌷 Note: हर औरत के लिए एक नसीहत
हर औरत के लिए ये एक गहरी सोच और नसीहत है — शायद ही कोई औरत ऐसी हो जो अपने शौहर के बिना जन्नत में जाना चाहे। हर नेक बीवी की तमन्ना यही होती है कि वो अपने शौहर के साथ ही जन्नत में दाखिल हो। लेकिन याद रखिए, शौहर की जन्नत का रास्ता उसके माँ-बाप की खिदमत से होकर गुजरता है — यानी अल्लाह ने बेटे की जन्नत को माँ-बाप की रज़ा और ख़िदमत में रखा है। और बीवी की जन्नत का रास्ता उसके शौहर की रज़ा में रखा गया है — यानी बीवी के लिए जन्नत की चाबी अपने शौहर को राज़ी रखना और उसकी ख़िदमत करना है।
तो सोचिए — अगर कोई औरत अपने शौहर को उसके माँ-बाप से दूर कर दे, तो क्या वो उसे उसकी जन्नत से अलग करके खुद जन्नत जा सकती है? असल हिकमत यही है कि औरत अपने शौहर के साथ उसके माँ-बाप की ख़िदमत में मददगार बने, न कि रुकावट। यही तरीका है दोनों के लिए जन्नत की राह आसान करने का। 🌿
➤ शौहर और बीवी के वालिदैन की खिदमत का मसला
इस्लामी शरीअत ने इंसानों के हुक़ूक़ बहुत स्पष्ट और न्यायपूर्ण अंदाज़ में बयान किए हैं। जैसे बीवी पर शौहर के माँ-बाप की खिदमत वाजिब नहीं, उसी तरह शौहर पर भी बीवी के माँ-बाप की खिदमत वाजिब नहीं है।
◈ शरीअत का हुक्म
- बीवी पर सिर्फ़ अपने शौहर की इताअत (आज्ञा मानना), उसका हक़ अदा करना और अपनी औलाद की परवरिश करना वाजिब है।
शौहर पर सिर्फ़ अपने माँ-बाप की खिदमत, हिफाज़त और उनकी ज़रूरतों को पूरा करना वाजिब है।
इसलिए बीवी को अपने सास-ससुर की खिदमत का शरई तौर पर कोई तक़ल्लुफ़ (compulsion) नहीं, और उसी तरह शौहर पर भी यह लाज़िम नहीं कि वह अपनी बीवी के माँ-बाप की खिदमत करे।
◈ सिला-रहमी और इंसानियत के नाते
कुरआन में अल्लाह तआला फरमाता है:
हाँ, अगर कोई शौहर अपनी बीवी के माँ-बाप की मदद करता है, या बीवी अपने सास-ससुर का ख़्याल रखती है, तो यह नेकी और इंसानियत का हिस्सा होगा, और इसका बड़ा सवाब मिलेगा।
कुरआन में अल्लाह तआला ने फ़रमाया:
"नेकी और तक़वा के कामों में एक-दूसरे की मदद करो।" (सूरह माएदा: 2)
इसलिए अगर कोई इंसान अपने जीवनसाथी के घरवालों के साथ अच्छा सलूक करता है, तो यह उसकी इंसानियत, मोहब्बत और सिला-रहमी (रिश्तों को जोड़ना) का सुबूत है। लेकिन इसे शरीअत का फ़र्ज़ या लाज़िमी हुक्म समझना ग़लत है।
🔑 नतीजा
- बीवी पर शौहर के माँ-बाप की खिदमत वाजिब नहीं।
- शौहर पर बीवी के माँ-बाप की खिदमत वाजिब नहीं।
- लेकिन दोनों में से कोई भी अगर मोहब्बत, इंसानियत या सिला-रहमी की नीयत से मदद करता है तो यह बेहतरीन अमल और अज्र का सबब है।
- जिस तरह शौहर बीवी को मां बाप की खिदमत के लिए ज़ोर नही दे सकता, ठीक उसी तरह बीवी भी अपने मां बाप या घर वालों के लिए शौहर को मजबूर न करे।
🌺 Conclusion (नसीहत)
Kya Biwi Par Saas Sasur ki khidmat Waajib Hai? कैसा लगा यह लेख अपनी राय comment box में ज़रूर दें।
याद रखें — अखलाक़, मोहब्बत और तआवुन से घरों में बरकत आती है, और यही असल इस्लाम की खूबसूरती है।
✦ کیا بیوی پر ساس سسر کی خدمت واجب ہے؟ – اسلامی شریعت اور علماء کی رائے
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| Shauhar ki zimmedari |
آج کے گھروں میں ایک عام سوال یہ پیدا ہوتا ہے کہ کیا بہو پر اپنے ساس سسر کی خدمت کرنا شریعت کی نظر میں ضروری ہے؟ اکثر شادی کے بعد بیوی سے یہ توقع رکھی جاتی ہے کہ وہ نہ صرف اپنے شوہر کی بلکہ اُس کے والدین کی بھی خدمت کرے۔ لیکن اصل سوال یہ ہے کہ اسلام نے بیوی پر کیا ذمہ داریاں ڈالی ہیں اور علماء کرام کی اس بارے میں کیا رائے ہے؟ اس مضمون میں ہم اس مسئلے کو قرآن، حدیث اور فقہاء کے اقوال کی روشنی میں سمجھیں گے۔
✦ 1. بیوی کی اصل ذمہ داری
اسلام نے عورت کی بنیادی ذمہ داری اُس کے شوہر اور اولاد کے ساتھ وابستہ کی ہے۔
اللہ تعالیٰ قرآن میں فرماتا ہے:
وَلَهُنَّ مِثْلُ الَّذِي عَلَيْهِنَّ بِالْمَعْرُوفِ ۚ وَلِلرِّجَالِ عَلَيْهِنَّ دَرَجَةٌ
(سورۃ البقرہ: 228)
یعنی عورتوں پر بھی ویسے ہی حقوق ہیں جیسے ان کے مردوں پر ہیں، البتہ مردوں کو ایک درجہ (ذمہ داری اور قوامیت) حاصل ہے۔
اس آیت سے صاف ظاہر ہے کہ بیوی کی ذمہ داری سب سے پہلے اُس کے شوہر کی طرف ہے، نہ کہ شوہر کے والدین کی طرف۔
✦ 2. ساس سسر کی خدمت کا حکم
شریعت کی روشنی میں:
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✦ 3. علماء کرام کے اقوال
✦ 4. شوہر کی ذمہ داری
اللہ تعالیٰ نے والدین کی خدمت کی ذمہ داری اولاد پر رکھی ہے، بہو پر نہیں۔
قرآن مجید میں ارشاد ہے:
✦ 5. اخلاقی پہلو
✦ 6. ایک سوچنے والی اہم بات
یہاں ایک اہم پہلو سوچنے کے قابل ہے۔ شریعت کی رو سے ساس سسر کی خدمت کرنا بیوی کی ذمہ داری نہیں، بلکہ بیٹے کی ذمہ داری ہے۔ بیٹے کو ہی اپنے والدین کی خدمت کرنی چاہیے۔
لیکن سوال یہ پیدا ہوتا ہے کہ اگر بیٹا ہر وقت والدین کی خدمت میں لگا رہے تو:
اس طرح بہو پر کوئی شرعی بوجھ بھی نہیں پڑتا اور بیٹا بھی اپنی اصل ذمہ داریاں (کمائی اور گھر چلانا) بہتر طریقے سے ادا کرسکتا ہے۔
🌷 Note : ہر عورت کے لئے ایک نصیحت
یہ نصیحت ہر عورت کے لیے ہے کہ ذرا غور کرے — شاید ہی کوئی عورت ایسی ہو جو اپنے شوہر کے بغیر جنت جانا چاہے۔ ہر نیک بیوی کی خواہش یہی ہوتی ہے کہ وہ اپنے شوہر کے ساتھ ہی جنت میں داخل ہو۔ لیکن یاد رکھو! شوہر کی جنت کا راستہ اس کی ماں کے قدموں سے ہو کر گزرتا ہے، یعنی اللہ تعالیٰ نے بیٹے کی جنت والدین کی رضا اور خدمت میں رکھی ہے۔ اور بیوی کی جنت کا راستہ اس کے شوہر کی رضا میں رکھا گیا ہے، یعنی بیوی کے لیے جنت کی چابی شوہر کو راضی رکھنا اور اس کی خدمت کرنا ہے۔ اگر کوئی عورت اپنے شوہر کو اس کے والدین سے جدا کر دے، تو کیا یہ ممکن ہے کہ وہ عورت اپنے شوہر کو جنت سے دور کر کے خود جنت میں جا سکے؟ اصل سمجھ یہ ہے کہ عورت اپنے شوہر کے ساتھ اس کے والدین کی خدمت میں مددگار بنے، نہ کہ رکاوٹ۔ اسی میں دونوں کی جنت کا راستہ آسان ہے۔ 🌿
➤ شوہر اور بیوی کے والدین کی خدمت کا مسئلہ
اسلامی شریعت نے انسانوں کے حقوق نہایت واضح اور عدل کے ساتھ بیان کیے ہیں۔ جس طرح بیوی پر شوہر کے ماں باپ کی خدمت واجب نہیں، بالکل اسی طرح شوہر پر بھی یہ واجب نہیں کہ وہ بیوی کے ماں باپ یا گھر والوں کی خدمت کرے۔
◈ شریعت کا حکم
◈ صلہ رحمی اور انسانیت کے ناطے
🔑 سبق
شوہر پر بیوی کے والدین کی خدمت واجب نہیں۔
البتہ اگر دونوں میں سے کوئی بھی محبت، انسانیت یا صلہ رحمی کی نیت سے خدمت کرے تو یہ بہترین عمل اور اجر کا سبب ہے۔
🌺 نتیجہ (نصیحت)
اسلامی شریعت نے بیوی کو صرف اپنے شوہر کی ذمہ داری کا پابند بنایا ہے، ساس سسر کی خدمت اُس پر لازم نہیں۔ لیکن اگر کوئی عورت محبت اور نیک نیت سے اپنے ساس سسر کی خدمت کرتی ہے تو یہ اُس کی نیکی اور ثواب کا سبب بنے گا۔ دوسری طرف شوہر کی ذمہ داری ہے کہ وہ اپنے والدین کی خدمت خود کرے اور بیوی پر زبردستی خدمت نہ ڈالے۔
یاد رکھیں — اخلاق، محبت اور تعاون سے ہی گھروں میں برکت آتی ہے، اور یہی اسلام کی اصل خوبصورتی ہے۔
📌 FAQs (हिंदी)
Q1: क्या बीवी पर सास-ससुर की खिदमत शरीअत में वाजिब है?
👉 नहीं, इस्लाम में बीवी पर सास-ससुर की खिदमत वाजिब या फ़र्ज़ नहीं है। यह बेटे (शौहर) की जिम्मेदारी है।
Q2: अगर बीवी अपने सास-ससुर की खिदमत करती है तो क्या उसे सवाब मिलेगा?
👉 जी हां, अगर वह मोहब्बत और नेक नीयत से खिदमत करती है, तो यह उसके लिए नेकी और बड़ा अज्र (सवाब) का सबब बनेगा।
Q3: अगर बीवी सास-ससुर की खिदमत नहीं करती तो क्या वह गुनाहगार होगी?
👉 नहीं, क्योंकि यह उसकी शरीअत की जिम्मेदारी नहीं है। गुनाह सिर्फ उसी चीज़ पर होता है जो अल्लाह ने फ़र्ज़ किया हो।
Q4: शौहर की क्या जिम्मेदारी है?
👉 शौहर पर अपने माँ-बाप की खिदमत करना और उनकी देखभाल करना लाज़िम है। अल्लाह ने औलाद को वालिदैन की खिदमत का हुक्म दिया है।
Q5: क्या बीवी को मजबूर करके सास-ससुर की खिदमत कराई जा सकती है?
👉 नहीं, शौहर को ऐसा करने का हक़ नहीं है। अगर बीवी खुशी से मदद करे तो यह बेहतर है, लेकिन मजबूरी जायज़ नहीं।
📌 FAQs (اردو)
سوال 1: کیا بیوی پر ساس سسر کی خدمت شریعت میں واجب ہے؟
👉 نہیں، اسلام میں بیوی پر ساس سسر کی خدمت واجب یا فرض نہیں ہے۔ یہ بیٹے (شوہر) کی ذمہ داری ہے۔
سوال 2: اگر بیوی اپنے ساس سسر کی خدمت کرتی ہے تو کیا اسے ثواب ملے گا؟
👉 جی ہاں، اگر وہ محبت اور نیک نیت سے خدمت کرتی ہے تو یہ اس کے لئے نیکی اور بڑا اجر بنے گا۔
سوال 3: اگر بیوی ساس سسر کی خدمت نہیں کرتی تو کیا وہ گناہگار ہوگی؟
👉 نہیں، کیونکہ یہ اس کی شرعی ذمہ داری نہیں ہے۔ گناہ صرف اسی چیز پر ہوتا ہے جو اللہ نے فرض کی ہو۔
سوال 4: شوہر کی کیا ذمہ داری ہے؟
👉 شوہر پر اپنے والدین کی خدمت کرنا اور ان کی دیکھ بھال کرنا لازم ہے۔ اللہ نے اولاد کو والدین کی خدمت کا حکم دیا ہے۔
سوال 5: کیا بیوی کو مجبور کر کے ساس سسر کی خدمت کرائی جا سکتی ہے؟
👉 نہیں، شوہر کو ایسا کرنے کا حق نہیں ہے۔ اگر بیوی خوش دلی سے مدد کرے تو یہ بہتر ہے، لیکن زبردستی جائز نہیں۔


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