अल्लाह सुब्हान व ताआला ने क़ुरआन मजीद में बहुत से नबियों के क़िस्से और वाक़ियात को बयान किया है ताकि इंसान इसे पढ़ कर नसीहत और इबरत हासिल करे। इन्हीं में से एक बहुत मशहूर और इबरत भरा वाक़िया हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम), मलिका सबा बिल्किस और हुदहुद परिंदे का है।
यह वाक़िया क़ुरआन की सूरह अन-नम्ल (आयत 20 से 44) में तफ़सील के साथ बयान किया गया है। इस वाक़िये से हमें तौहीद, दावत-ए-हक़ और अल्लाह की कुदरत के बारे में बहुत बड़ी सीख मिलती है।
हज़रत सुलेमान (अ.स) को मिली खास नेमत
अल्लाह तआला ने हज़रत सुलेमान (अ.स) को बहुत बड़ी बादशाहत दी थी। उनके पास इंसान, जिन्न और परिंदों का बहुत बड़ा लश्कर था जो सब उनके हुक्म के मुताबिक काम करते थे।क़ुरआन में अल्लाह फरमाता है:
और सुलेमान दाऊद का वारिस बना और उसने कहा: ऐ लोगो! हमें परिंदों की बोली सिखाई गई है और हमें हर चीज़ में से दिया गया है।”
(सूरह अन-नम्ल 27:16)
इस आयत से पता चलता है कि अल्लाह ने हज़रत सुलेमान (अ.स) को परिंदों की भाषा समझने की खास ताकत दी थी।
हुदहुद का गायब होना
एक दिन हज़रत सुलेमान (अ.स) ने अपने लश्कर का जायज़ा लिया। जब उन्होंने परिंदों को देखा तो हुदहुद परिंदा नजर नहीं आया।क़ुरआन में आता है:
और उसने परिंदों का जायज़ा लिया तो कहा: क्या बात है कि मैं हुदहुद को नहीं देख रहा? क्या वह गैर हाज़िर है?”फिर हज़रत सुलेमान (अ.स) ने कहा:
(सूरह अन-नम्ल 27:20)
अगर वह कोई साफ़ दलील लेकर नहीं आया तो मैं उसे सख्त सज़ा दूँगा या उसे ज़बह कर दूँगा।”इससे पता चलता है कि नबी की हुकूमत में कानून और जिम्मेदारी बहुत अहम थी।
(सूरह अन-नम्ल 27:21)
हुदहुद की वापसी और अहम खबर
थोड़ी देर बाद हुदहुद वापस आया और उसने एक बड़ी खबर सुनाई।उसने कहा:
मैं आपके पास सबा से एक पक्की खबर लेकर आया हूँ।”
(सूरह अन-नम्ल 27:22)
हुदहुद ने बताया कि सबा (आज का यमन) में एक रानी हुकूमत करती है जिसका नाम मलिका बिल्कीस था।
सबा की रानी और सूरज की पूजा
हुदहुद ने बताया कि उस रानी को बहुत बड़ा तख्त और बहुत सी नेमतें दी गई हैं। लेकिन एक बहुत बड़ी गलती थी।वह और उसकी क़ौम अल्लाह को छोड़कर सूरज की पूजा करते थे।
क़ुरआन में है:
मैंने उसे और उसकी क़ौम को देखा कि वे अल्लाह को छोड़कर सूरज को सज्दा करते हैं।”
(सूरह अन-नम्ल 27:24)
यानी वे लोग शिर्क में पड़े हुए थे।
हज़रत सुलेमान (अ.स) का खत
जब हुदहुद ने यह खबर दी तो हज़रत सुलेमान (अ.स) ने उसे एक खत दिया और कहा कि इसे रानी तक पहुँचा दो।उस खत में लिखा था:
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम। मेरे सामने सरकशी न करो और आज्ञाकारी बनकर मेरे पास आ जाओ।”
(सूरह अन-नम्ल 27:30-31)
यह क़ुरआन में आने वाला पहला मुकम्मल खत है जिसमें बिस्मिल्लाह से शुरुआत की गई।
मलिका सबा का मशवरा
जब रानी को यह खत मिला तो उसने अपने दरबारियों को बुलाया और कहा:ऐ मेरे दरबारियों! मुझे एक बहुत अहम खत भेजा गया है।”
(सूरह अन-नम्ल 27:29)
दरबारियों ने कहा कि हमारे पास ताकत है और हम युद्ध कर सकते हैं। लेकिन रानी ने समझदारी से काम लिया और पहले तोहफा भेजकर मामला समझने की कोशिश की।
हज़रत सुलेमान (अ.स) का जवाब
जब रानी की तरफ से तोहफा आया तो हज़रत सुलेमान (अ.स) ने उसे स्वीकार नहीं किया।उन्होंने कहा:
क्या तुम मुझे माल से मदद देना चाहते हो? जो अल्लाह ने मुझे दिया है वह तुम्हारे माल से बेहतर है।”
(सूरह अन-नम्ल 27:36)
इससे पता चलता है कि अल्लाह के नबी दुनिया के लालची नहीं होते।
रानी का तख्त मंगवाना
जब रानी हाज़िर होने वाली थी तो हज़रत सुलेमान (अ.स) ने अपने दरबार में पूछा:“तुम में से कौन है जो उसके आने से पहले उसका तख्त यहाँ ला सकता है?”
एक जिन्न ने कहा कि मैं इसे ला सकता हूँ। लेकिन एक ऐसे व्यक्ति ने, जिसके पास किताब का इल्म था, कहा:
मैं इसे आपकी आँख झपकने से पहले ले आऊँगा।”और अल्लाह के हुक्म से मलिका सबा का तख्त तुरंत हाज़िर हो गया।
(सूरह अन-नम्ल 27:40)
मलिका सबा का इस्लाम कबूल करना
जब मलिका सबा हज़रत सुलेमान (अ.स) के पास पहुँची और उसने अल्लाह की कुदरत देखी तो उसे सच्चाई समझ में आ गई।तब उसने कहा:
ऐ मेरे रब! मैंने अपने ऊपर ज़ुल्म किया और अब मैं सुलेमान के साथ अल्लाह, जो सारे जहानों का रब है, उसकी फरमाबरदार बन गई हूँ।”
(सूरह अन-नम्ल 27:44)
इस तरह मलिका सबा ने इस्लाम कबूल कर लिया।
इस वाक़िये से मिलने वाली बड़ी सीख
1. तौहीद की दावत
नबी हमेशा लोगों को सिर्फ अल्लाह की इबादत की तरफ बुलाते हैं।
2. हिकमत के साथ दावत देना
हज़रत सुलेमान (अ.स) ने पहले खत भेजकर समझाने की कोशिश की।
3. अल्लाह की कुदरत
तख्त का एक पल में आ जाना अल्लाह की बड़ी कुदरत है।
4. इल्म की अहमियत
जिसके पास किताब का इल्म था उसने यह काम तुरंत कर दिया।
Note:
नतीजा (Conclusion):
हज़रत सुलेमान (अ.स) और हुदहुद का वाक़िया क़ुरआन के सबसे खूबसूरत और इबरत भरे वाक़ियात में से है। यह हमें सिखाता है कि इंसान को हमेशा सिर्फ अल्लाह की इबादत करनी चाहिए और शिर्क से बचना चाहिए।यह वाक़िया यह भी बताता है कि जब इंसान सच्चाई को पहचान ले तो उसे बिना हिचकिचाहट के कबूल कर लेना चाहिए, जैसा कि मलिका सबा ने किया।
FAQs (Hindi)
1. हज़रत सुलेमान (अ.स) को कौन-सी खास ताकत दी गई थी?
अल्लाह तआला ने हज़रत सुलेमान (अ.स) को बहुत बड़ी बादशाहत दी थी। उन्हें इंसानों, जिन्नों और परिंदों पर हुकूमत दी गई थी और उन्हें परिंदों की भाषा समझने की शक्ति भी दी गई थी।
2. हुदहुद परिंदा कौन था?
हुदहुद एक छोटा परिंदा था जो हज़रत सुलेमान (अ.स) के लश्कर का हिस्सा था। उसी ने सबा की रानी और उसकी क़ौम की खबर हज़रत सुलेमान (अ.स) तक पहुँचाई थी।
3. मलिका सबा कौन थी?
मलिका सबा यमन की रानी थी जिसे बिल्कीस के नाम से भी जाना जाता है। वह और उसकी क़ौम सूरज की पूजा करते थे, जब तक कि हज़रत सुलेमान (अ.स) ने उन्हें अल्लाह की इबादत की दावत नहीं दी।
4. हज़रत सुलेमान (अ.स) ने मलिका सबा को क्या संदेश भेजा था?
हज़रत सुलेमान (अ.स) ने एक खत भेजा था जिसमें लिखा था कि अल्लाह के सामने सर झुकाओ और मेरे मुकाबले में सरकशी मत करो।
5. मलिका सबा ने इस्लाम क्यों कबूल किया?
जब मलिका सबा ने हज़रत सुलेमान (अ.स) की हिकमत और अल्लाह की कुदरत देखी तो उसने सच्चाई को पहचान लिया और अल्लाह पर ईमान ले आई।

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