क़यामत का दिन वो खौफ़नाक दिन होगा "Jab Apne Hi Apno Se Door Bhagenge" जिसका ज़िक्र क़ुरआन ए करीम में बार बार किया गया है। वह दिन बहुत ही डरावना और सख़्त दिन होगा।ये वह दिन होगा जब हर इंसान सिर्फ़ अपनी फ़िक्र में होगा। अल्लाह सुब्हान व ताआला क़ुरआन में फरमाता है कि उस दिन इंसान अपने सबसे क़रीबी रिश्तों से ही भागेगा। आज दुनिया में जिन रिश्तों (माँ-बाप, भाई, बीवी, बच्चे) के लिए हम सब कुछ करते हैं, उसी दिन इंसान उनसे दूर भागेगा।
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Qiyamat ke din har insaan apni najat ki fikr mein |
आख़िर ऐसा क्यूँ होगा? आइए इस आर्टिकल "Jab Apne Hi Apno Se Door Bhagenge" में हम क़ुरआन और हदीस की रोशनी में इस हक़ीक़त को समझते हैं।
उस दिन से मुतल्लिक़ क़ुरआन का फरमान
अल्लाह तआला क़ुरआन में फरमाता है:
“उस दिन इंसान अपने भाई से भागेगा, अपनी माँ और बाप से, और अपनी बीवी और बच्चों से।”
(सूरह अबसा: 34-36)
हर इंसान सिर्फ अपनी निजात की फ़िक्र में होगा
क़यामत के दिन सबसे बड़ी हक़ीक़त यह होगी कि हर इंसान बहुत परेशान होगा।उसे सिर्फ अपनी जान बचाने की फिक्र होगी।
- Na maa yaad aayegi
- Na baap ka khayal hoga
- Na biwi-bachon ki parwah hogi
हर कोई कहेगा: “मुझे बस बचना है”
अपने गुनाहों का डर और हिसाब का ख़ौफ़
उस दिन हर इंसान को अपने हर छोटे-बड़े गुनाह का हिसाब देना होगा।
- Chhoti se chhoti baat bhi likhi hogi
- Har amal ka record hoga
- Koi bhi cheez chhupi nahi rahegi
इसी लिए इंसान डर के मारे अपनो से भी दूर भागेगा, कहीं कोई उससे अपना हक़ न मांग ले।
लोग अपने हक़ माँगेंगे
क़यामत के दिन लोग एक-दूसरे से अपने हक़ माँगेंगे।
- Maa kahegi: “Mere haq kyun nahi diye?”
- Bhai kahega: “Mere saath zulm kyun kiya?”
- Biwi aur bachche bhi apna hisaab maangenge
इस डर से इंसान अपने ही लोगों से दूर भागेगा।
उस दिन रिश्ते काम नहीं आएंगे
दुनिया में रिश्तों की बहुत अहमियत है, लेकिन क़यामत के दिन:
- कोई किसी का बोझ नहीं उठाएगा
- कोई किसी के गुनाह अपने ऊपर नहीं लेगा
- बिना अल्लाह की इजाज़त कोई किसी की मदद नहीं कर पाएगा
अल्लाह सुब्हान व ताआला फरमाता है :
"कोई किसी का बोझ नहीं उठाएगा उस दिन"
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मंजर बहुत खौफनाक होगा
क़यामत का मंजर बहुत ही डरावना होगा:- आसमान फट जाएगा
- ज़मीन हिलने लगेगी
- पहाड़ रुई की तरह उड़ जाएंगे
“नफ्सी नफ्सी” का आलम
हदीस में आता है कि उस दिन हर इंसान कहेगा:
“नफ्सी नफ्सी” (मेरी जान, मेरी जान)
यानी हर कोई सिर्फ अपनी फ़िक्र में होगा, किसी और की नहीं सोचेगा।
हमें क्या सीख मिलती है?
1. अपनी आख़िरत की तैयारी करें
हमें सिर्फ दुनिया नहीं, बल्कि आख़िरत की भी तैयारी करनी चाहिए।
2. लोगों के हक़ अदा करें
- किसी का हक़ न मारें
- किसी पर ज़ुल्म न करें
- हर रिश्ते का हक़ पूरा करें
3. सिर्फ अल्लाह पर भरोसा रखें
आख़िर में न कोई अपना काम आएगा और न कोई रिश्तेदार,सिर्फ अल्लाह ही मदद करेगा।
Conclusion:
Qiyamat ka din "Jab Apne Hi Apno Se Door Bhagenge" Nafsi Nafsi ka alam Hoga,ek aisa din hoga jahan duniya ke tamam rishtey toot jayenge aur har insaan apni najat ki fikr mein hoga. Is liye humein chahiye ke aaj hi apni zindagi ko sudhaaren, gunahon se bachein aur Allah ke hukm ke mutabiq zindagi guzaren.
FAQs:
1. क़यामत के दिन इंसान अपनों से क्यों भागेगा?
क़यामत के दिन हर इंसान अपने गुनाहों के हिसाब और सज़ा के डर से सिर्फ अपनी जान बचाने की सोचता रहेगा, इसलिए वह अपनों से भी दूर भागेगा।
2. क्या उस दिन माँ-बाप भी मदद नहीं करेंगे?
नहीं, उस दिन कोई किसी की मदद नहीं कर पाएगा। हर इंसान अपनी परेशानी में होगा।
3. “नफ्सी नफ्सी” का क्या मतलब है?
“नफ्सी नफ्सी” का मतलब है “मेरी जान, मेरी जान”, यानी हर इंसान सिर्फ अपनी चिंता करेगा।
4. क्या क़यामत के दिन रिश्ते काम आएंगे?
नहीं, उस दिन दुनिया के रिश्ते काम नहीं आएंगे। सिर्फ अल्लाह की रहमत ही इंसान को बचा सकती है।
5. हमें इससे क्या सीख मिलती है?
हमें अपनी आख़िरत की तैयारी करनी चाहिए, गुनाहों से बचना चाहिए और लोगों के हक़ अदा करने चाहिए।

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