Ramzan Ke Aakhri Ashre Ki Duayein Aur Aamal | Jahannum Se Nijat Ka Tareeqa

रमज़ान का आख़िरी अशरा जहन्नम से निजात का सबसे क़ीमती मौक़ा है, जिसे समझदारी और इख़लास के साथ गुज़ारना चाहिए।

रमज़ान का महीना रहमत, बरकत और मग़फ़िरत का महीना है। और  Ramzan Ke Aakhri Ashre Ki Duayein Aur Aamal की अहमियत बहुत ज़्यादा है। इसका आख़िरी अशरा सबसे ज़्यादा अहम और बरकत वाला माना जाता है। यही वह दस दिन होते हैं जिनमें मुसलमान ज़्यादा से ज़्यादा इबादत करते हैं, अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी मांगते हैं और जहन्नम से निजात की दुआ करते हैं।

इसी आख़िरी अशरे में लैलतुल क़द्र जैसी मुबारक रात भी होती है, जो हजार महीनों से बेहतर है। इसलिए मुसलमान इन दिनों में ज़्यादा नमाज़, क़ुरआन की तिलावत, दुआ और इस्तिग़फ़ार करनी चाहिए। 

✍️ By: Mohib Tahiri | 🕋 Islamic Articles| Ramzan Aur ibadat| Shab e Qadr| Qayam e lail 🕰 Updated: 9 Mar 2026
Ramzan ke Aakhri ashre me raat ki ibadat ka manzar

Aakhri ashra nijat aur maghfirat ka waqt hai 

इस लेख Ramzan Ke Aakhri Ashre Ki Duayein Aur Aamal में हम जानेंगे कि रमज़ान के आख़िरी अशरे, आखिरी अशरे की दुआमें कौन-कौन सी हैं और लैलतुल क़द्र में कौन से अ़माल करने चाहिए, ताकि हम इस मुबारक वक़्त का सही फ़ायदा उठा सकें और अल्लाह की रहमत, मग़फ़िरत और जहन्नम से निजात हासिल कर सकें।


रमज़ान के आख़िरी अशरे क्या है?

रमज़ान का आख़िरी अशरा (आख़िरी दस दिन) बहुत ही मुबारक और बरकत वाला होता है। इन दिनों में अल्लाह तआला अपने बंदों पर खास रहमत नाज़िल करता है और बहुत से लोगों को जहन्नम से निजात देता है

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रमज़ान के आख़िरी अशरे का मक़सद

रमज़ान के आख़िरी अशरे का सबसे बड़ा मक़सद यह है:
  • अल्लाह से मग़फिरत हासिल करना
  • लैलतुल क़द्र की तलाश करना
  • जहन्नम से निजात पाना

अल्लाह तआला फ़रमाता है:

“लैलतुल क़द्र हज़ार महीनों से बेहतर है।”
(सूरह अल-क़द्र 97:3)
इस एक रात की इबादत 83 साल से भी ज्यादा इबादत से बेहतर है।

नबी ﷺ रमज़ान के आख़िरी अशरे में इबादत को और ज़्यादा बढ़ा देते थे।

हज़रत आयशा (रज़ि.) बयान करती हैं:
“जब रमज़ान के आख़िरी दस दिन आते तो नबी ﷺ अपनी कमर कस लेते, रातों को इबादत करते और अपने घर वालों को भी जगा देते।”
(सहीह बुखारी: 2024, सहीह मुस्लिम: 1174)
इस हदीस से मालूम होता है कि रमज़ान का आख़िरी अशरा इबादत और दुआ का सबसे कीमती वक्त है।

रमज़ान के आख़िरी अशरे की अहम दुआएँ

लैलतुल क़द्र की मशहूर दुआ

यह दुआ नबी ﷺ ने खुद सिखाई।

اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ العَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي

उच्चारण (Roman)
Allahumma innaka ‘afuwwun tuhibbul ‘afwa fa’fu ‘anni

Hindi 

“अल्लाहुम्मा इन्नका अफ़ुव्वुन तुहिब्बुल अफ़्वा फ़अफ़ु अन्नी।”

तरजुमा
“ऐ अल्लाह! तू माफ़ करने वाला है और माफ़ी को पसंद करता है, इसलिए मुझे भी माफ़ कर दे।”

हदीस

हज़रत आयशा (रज़ि.) ने पूछा:

“ऐ अल्लाह के रसूल ﷺ! अगर मुझे लैलतुल क़द्र मिल जाए तो मैं क्या दुआ पढ़ूँ?”
तो आपने फरमाया:
“यह दुआ पढ़ो।”
“अल्लाहुम्मा इन्नका अफ़ुव्वुन तुहिब्बुल अफ़्वा फ़अफ़ु अन्नी।”📘 (तिर्मिज़ी)
(तिर्मिज़ी 3513)

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मग़फिरत की दुआ

رَبِّ اغْفِرْ لِي وَتُبْ عَلَيَّ إِنَّكَ أَنْتَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ

उच्चारण
Rabbi ighfir li wa tub ‘alayya innaka antat-Tawwabur-Raheem

तरजुमा
“ऐ मेरे रब! मुझे माफ़ कर दे और मेरी तौबा क़बूल कर ले।”


रमज़ान के आख़िरी अशरे के अहम आमाल

क़ियामुल-लैल (तहज्जुद)

रमज़ान की रातों में खासकर आख़िरी अशरे में तहज्जुद पढ़ना और लंबी इबादत करना बहुत बड़ा सवाब है।
हदीस
“जो व्यक्ति ईमान और सवाब की नीयत से लैलतुल क़द्र में क़ियाम करता है, उसके पिछले गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।”
(सहीह बुखारी 1901)

एतिकाफ़

नबी ﷺ रमज़ान के आख़िरी अशरे में एतिकाफ़ किया करते थे।
हदीस
“नबी ﷺ रमज़ान के आख़िरी दस दिनों में एतिकाफ़ करते थे।”
(सहीह बुखारी 2026)

एतिकाफ़ का मतलब है कि इंसान मस्जिद में रहकर दुनिया के कामों से अलग होकर सिर्फ अल्लाह की इबादत में लग जाए।

क़ुरआन की तिलावत

रमज़ान क़ुरआन का महीना है और आख़िरी अशरे में ज़्यादा से ज़्यादा क़ुरआन पढ़ना चाहिए। क्योंकि क़ुरआन इसी महीना में नाज़िल हुआ ब

“रमज़ान वह महीना है जिसमें क़ुरआन उतारा गया।”
(सूरह अल-बक़रह 2:185)

सदक़ा और खैरात

रमज़ान में गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करना बहुत बड़ा सवाब है। इस महीने में ज़्यादा से ज़्यादा सकदा ख़ैरात करनी चाहिए क्योंकि 

“रसूलुल्लाह ﷺ सबसे ज्यादा सख़ी थे और रमज़ान में और भी ज्यादा सख़ी हो जाते थे।”
(सहीह बुखारी)

लैलतुल क़द्र की तलाश

लैलतुल क़द्र रमज़ान के आख़िरी अशरे की ताक़ रातों में होती है।

जैसे:
  • 21वीं रात
  • 23वीं रात
  • 25वीं रात
  • 27वीं रात
  • 29वीं रात
नबी ﷺ ने फ़रमाया:
“लैलतुल क़द्र को रमज़ान के आख़िरी दस दिनों की ताक़ रातों में तलाश करो।”
(सहीह बुखारी 2017)
इसलिए इन रातों में ज्यादा से ज्यादा इबादत करनी चाहिए।

आज के मुसलमान के लिए नसीहत

आज अफसोस की बात है कि कई लोग रमज़ान के आख़िरी अशरे को शॉपिंग, कपड़े और दुनिया के कामों में गुजार देते हैं, अक्सर मुसलमान मर्द औरतें और बच्चे दिन में या अफ़्तार के बाद खरीदारी के लिए निकल पड़ते है और खरीदारी कर के ही थक जाते हैं तो वो इबादत क्या करेंगे जबकि यही दिन मग़फिरत और जहन्नम से निजात पाने के सबसे कीमती दिन हैं।

एक समझदार मुसलमान को चाहिए कि वह:
  • रातों में इबादत करे
  • ज्यादा से ज्यादा दुआ करे
  • क़ुरआन पढ़े
  • तौबा और इस्तिग़फार करे
क्योंकि कौन जानता है कि यह रमज़ान हमारी ज़िंदगी का आख़िरी रमज़ान हो।


आख़िरी पैग़ाम

आख़िरी अशरा सिर्फ़ दुआओं का नहीं, बल्कि फ़ैसले का वक़्त है।

या तो हम

👉 जहन्नम से आज़ादी लिखवा लें
या
👉 इस मौक़े को गंवा दें।

अल्लाह हमें आख़िरी अशरे की क़द्र करने,
लैलतुल क़द्र पाने
और जहन्नम से निजात पाने वालों में शामिल करे।

आमीन या रब 🤲

Conclusion:

रमज़ान का आख़िरी अशरा अल्लाह की रहमत, मग़फिरत और जहन्नम से निजात का सबसे बड़ा मौका है। जो इंसान इन दिनों को इबादत, दुआ और तौबा में गुजारता है अल्लाह तआला उसे बेशुमार सवाब और अपनी रहमत से नवाजता है।

इसलिए हमें चाहिए कि हम रमज़ान के आख़िरी दिनों को गफलत में नहीं बल्कि इबादत और अल्लाह की याद में गुजारें।


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FAQs Roman

Ramzan ke aakhri ashre ki sabse afzal dua kya hai?

Sabse afzal dua “Allahumma innaka ‘afuwwun tuhibbul ‘afwa fa’fu ‘anni” hai jo Laylatul Qadr ke liye padhi jati hai।

Laylatul Qadr kab hoti hai?

Laylatul Qadr Ramzan ke aakhri ashre ki taaq raaton (21, 23, 25, 27, 29) mein hoti hai।

Ramzan ke aakhri ashre mein kaun se aamal karne chahiye?

Tahajjud, Qur’an ki tilawat, dua, sadqa aur Itikaf sabse afzal aamal hain।

Ramzan ka aakhri ashra kyun aham hai?

Kyuki ismein Laylatul Qadr hoti hai aur Allah bandon ko Jahannum se nijat ata karta hai।

FAQs Hindi

1. रमज़ान के आखिरी अशरे की सबसे अफ़ज़ल दुआ कौन सी है?

सबसे अफ़ज़ल दुआ “Allahumma innaka ‘afuwwun tuhibbul ‘afwa fa’fu ‘anni” है।

2. लैलतुल क़द्र कब होती है?

लैलतुल क़द्र रमज़ान के आखिरी अशरे की ताक़ रातों में होती है।

3. आखिरी अशरे में कौन से आमाल करने चाहिए?

आख़िरी अशरे में तहज्जुद, क़ुरआन की तिलावत, दुआ, सदक़ा और एतिकाफ़।

4. आख़िरी अशरे की सबसे अहम दुआ

यह दुआ इस अशरे की रूह है:
اللَّهُمَّ أَجِرْنِي مِنَ النَّارِ
“ऐ अल्लाह! मुझे जहन्नम की आग से बचा ले।”

 इस दुआ को:

हर नमाज़ के बाद
सेहरी और इफ़्तार में
तहज्जुद में बार-बार पढ़ें।

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